तुमसे न हो पाएगा... भारत-चीन की दुकान बंद करने चले थे ट्रंप, एक्सपर्ट्स ने बता दी औकात
Updated on
04-08-2025 02:26 PM
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाया है। हालांकि फार्मा को इससे अलग रखा गया है लेकिन ट्रंप ने इस पर भी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इसकी वजह यह है कि ट्रंप ने फार्मा कंपनियों को अमेरिका में दवा बनाने की क्षमता का विस्तार करने को कहा है। भारत और जापान अमेरिका को जेनरिक दवाओं के सबसे बड़ा सप्लायर हैं। मतलब साफ है कि ट्रंप दवाओं के मामले में अमेरिका को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अमेरिका में अपनी कैपेसिटी बढ़ाने की बात कही है। लेकिन जानकारों का कहना है कि अमेरिका के लिए दवा सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना आसान नहीं है।
ट्रंप की दवाओं के आयात पर टैरिफ लगाने की धमकी के बाद कई दवा कंपनियों ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस बढ़ाने की बात कही है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक एस्ट्राजेनेका ने अमेरिका में 50 अरब डॉलर, जॉनसन एंड जॉनसन ने 55 अरब डॉलर और एली लिली ने 27 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। कुल मिलाकर दवा कंपनियां अमेरिका में 250 अरब डॉलर का निवेश करने जा रही हैं। ट्रंप का कहना है कि यह देश के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। साथ ही उन्होंने दवा कंपनियों से कीमत में कमी की भी मांग की है।
कई देशों से जुड़े हैं तार
लेकिन जानकारों का कहना है कि दवा कंपनियों के इस निवेश के बावजूद अमेरिका की विदेश पर निर्भरता में कमी आने की उम्मीद नहीं है। दवा बनाने में काम आने वाले कच्चे माल के लिए अमेरिका को विदेशों पर ही निर्भर रहना होगा। साथ ही अमेरिका के लोगों के लिए दवा की कीमत में कमी आने की भी उम्मीद नहीं है। इसकी वजह यह है कि फार्मा इंडस्ट्री के तार दुनिया के कई देशों से जुड़े हैं। अमेरिका और विदेशी कंपनियां भी लंबे समय से कई दवाएं अमेरिका में ही बना रही हैं।
एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रंप की धमकी के बाद कुछ कंपनियां अमेरिका में प्रॉडक्शन बढ़ा सकती हैं। लेकिन जेनरिक दवा बनाने वाली कंपनियों ने ऐसा कोई वादा नहीं किया है। इसकी वजह यह है कि वे इस तरह का जोखिम नहीं ले सकती हैं क्योंकि उनका मार्जिन बहुत कम होता है। कुछ जेनरिक दवाएं अमेरिका में ही बनाई जाती हैं। इनमें स्टेराइल इंजेक्टेबल ड्रग्स,ओरल लिक्विड मेडिकेशन और कंट्रोल्ड सब्सटेंसेज शामिल हैं। लेकिन अधिकांश दवाएं और कैप्सूल विदेशों खासकर भारत में बनती हैं।
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