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महाराष्ट्र में शिंदे समेत 16 की विधायकी बरकरार स्पीकर ने कहा- उनका गुट असली शिवसेना

Updated on 11-01-2024 12:14 PM

महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत उनके गुट के 16 विधायकों की सदस्यता बरकरार रखी है। स्पीकर राहुल नार्वेकर ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि शिंदे गुट ही असली शिवसेना है। स्पीकर ने उद्धव गुट के 14 विधायकों की सदस्यता भी बरकरार रखी।

शिंदे गुट को असली शिवसेना बताए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि स्पीकर के फैसले से सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हुई है। नतीजा मैच फिक्सिंग ही निकला, इसलिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ खुद संज्ञान लेकर कार्यवाही करे।

फैसले की 3 अहम बातें...

शिंदे के पास शिवसेना के 55 में से 37 विधायक, उनका गुट ही असली शिवसेना। चुनाव आयोग ने भी यह फैसला दिया था।

शिंदे को विधायक दल के नेता पद से हटाने का फैसला उद्धव का था, पार्टी का नहीं। शिवसेना संविधान के अनुसार वे अकेले किसी को पार्टी से नहीं निकाल सकते।

शिंदे गुट की तरफ से उद्धव गुट के 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग खारिज। शिंदे गुट ने केवल आरोप लगाए, उनके समर्थन में सबूत नहीं दिए।

फैसले के आधार...

शिवसेना के 1999 के संविधान को ही आधार माना गया। स्पीकर ने कहा- 2018 का संशोधित संविधान चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए वह मान्य नहीं।

21 जून 2022 को फूट के बाद शिंदे गुट ही असली शिवसेना था। उद्धव गुट के सुनील प्रभु का व्हिप उस तारीख के बाद लागू नहीं होता, इसीलिए बतौर व्हिप भरत गोगावले की नियुक्ति सही है।

​​​​​​​उद्धव बोले- शिवसेना कभी शिंदे की नहीं हो सकती

फैसले के बाद उद्धव ने कहा कि खुद दो-तीन पार्टियां बदलने वाले नार्वेकर ने बताया कि पार्टी कैसे बदलनी है। शिवसेना कभी शिंदे की हो नहीं सकती। उनका और शिवसेना का रिश्ता खत्म हुआ है, इसलिए शिवसेना हमारी है।

शिवसेना की टूट के 18 महीने और 18 दिन बाद फैसला

शिवसेना में टूट 20 जून 2022 को हुई थी। स्पीकर ने फैसला 10 जनवरी 2024 को सुनाया। यानी विवाद शुरू होने के 18 दिन और 18 महीने बाद इस केस में फैसला आया। विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने बुधवार शाम 5.11 से 6.57 तक कुल 106 मिनट (1 घंटा 46 मिनट) में 1200 पेज के फैसले से चुनिंदा अंश पढ़े।

सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर को फैसला लेने की मियाद तय की

सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2023 को इस मामले में आखिरी सुनवाई की थी। तब स्पीकर के लिए फैसला लेने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 10 जनवरी कर दी थी। यानी सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई के 28वें दिन स्पीकर ने अपना फैसला सुनाया।

अब आगे क्या: अजित गुट को भी मिल सकती वैधता
चुनाव आयोग के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि असली शिवसेना एकनाथ शिंदे ही हैं। अब कई नेता और कार्यकर्ता जो उद्धव ठाकरे के साथ हैं, शिंदे के साथ जुड़ सकते हैं। इसका फायदा शिंदे को अगले चुनाव में मिलेगा।

भाजपा और शिंदे गुट द्वारा पिछले एक साल से रोका गया कैबिनेट विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है। इससे दोनों पक्षों की नाराजगी दूर करने में मदद मिलेगी। इस मंत्रालय के प्रभाव से संबंधित विधायकों के लोकसभा क्षेत्रों में गठबंधन को फायदा होगा।

स्पीकर के फैसले के खिलाफ उद्धव गुट सुप्रीम कोर्ट जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई के फैसले में शिंदे गुट के व्हिप भरत गोगावले की नियुक्ति को अवैध ठहराया था। नार्वेकर ने इसे वैध ठहराया है। इस मुद्दे पर उद्धव गुट जोर देगा।

भाजपा ने जिस तरह शिंदे के ग्रुप को तोड़ा था, उसी तर्ज पर अजित पवार के ग्रुप को राष्ट्रवादी पार्टी से तोड़ा था। अब शिंदे का ग्रुप वैध हो गया है तो पवार के ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई की आशंका कम है।

शिंदे गुट के पार्टी कार्यालय के बाहर जश्न मना

विधायकों की सदस्यता बहाल रहने का फैसला आने के बाद शिवसेना कार्यालय बाला साहेब भवन के बाहर जश्न हुआ। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के बाहर एकनाथ शिंदे जिंदाबाद के नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटी।

स्पीकर ने फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा था

14 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए राहुल नार्वेकर को 10 दिन का और समय दिया था। नार्वेकर को पहले 31 दिसंबर तक का समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने डेडलाइन बढ़ाकर 10 जनवरी 2024 कर दी।

शिवसेना (उद्धव गुट) ने पार्टी तोड़कर जाने वाले विधायकों को अयोग्य घोषित करने के मामले में जल्द फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान नार्वेकर ने कोर्ट को बताया था कि विधायकों की अयोग्यता को लेकर 2 लाख 71 हजार से अधिक पन्नों के डॉक्यूमेंट्स दाखिल किए गए हैं। महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र भी चल रहा है। इसलिए फैसला लेने के लिए 3 हफ्ते का समय लगेगा।

स्पीकर नार्वेकर की दलील पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि विधानसभा स्पीकर ने फैसले में देरी के जो कारण बताए हैं, वो वाजिब हैं। हम अध्यक्ष को फैसला सुनाने के लिए 10 जनवरी तक का समय देते हैं।

फैसले के खिलाफ कोर्ट का सहारा लिया जा सकता है

सुप्रीम कोर्ट के वकील सिद्धार्थ शिंदे ने कहा कि अगर ठाकरे या शिंदे गुट को विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय मान्य नहीं है, तो दोनों समूह 30 दिन के अंदर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अगर कोर्ट इस फैसले पर रोक लगाता है तो याचिकाकर्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन इसके बाद भी राष्ट्रपति के फैसले पर रोक लगवाना भी चुनौतीपूर्ण है।



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