सीट बंटवारे का पेच सुलझाने के चार फॉर्म्युले
- पहला- विधान सभा में जिसकी जितनी सीटें: कहा जा रहा है कि विवाद से बचने के लिए 2020 विधान सभा में किसके कितने विधायक हैं उस आधार पर लोकसभा सीटें उन्हें दी जाएंगी। इस आधार पर राजद सबसे बड़ी पार्टी है। इनके 79 विधायक है। दूसरे नंबर पर जदयू है जिसके 45 विधायक हैं। तीसरे नंबर पर कांग्रेस है जिनके 19 विधायक हैं। चौथे नंबर पर माले है जिसके पास 12 विधायक है। इसके अलावा माकपा और भाकपा के भी दो दो विधायक हैं।
- दूसरा- बिहार विधान सभा में प्राप्त मत प्रतिशत: एक फॉर्मूला यह भी हो सकता है। इसके अनुसार राजद सबसे बड़ी पार्टी है और उनका वोट प्रतिशत 23.11 प्रतिशत है। जदयू को पिछले विधानसभा चुनाव में 15.42 प्रतिशत मत मिले थे। वाम दलों को मत तो 1. 75 प्रतिशत मिला था मगर सीट सिर्फ 12 मिली थी। कांग्रेस को लगभग 6 प्रतिशत वोट मिले थे और सीटें 19 थीं।
- तीसरा- पिछले लोकसभा चुनाव में दलों की स्थिति: इस फॉर्म्युले में जदयू के 16 सीटिंग सांसद हैं। कांग्रेस का एक सीटिंग सांसद हैं। राजद का कोई सीटिंग सांसद नहीं है पर 19 जगहों पर वो दूसरे नंबर पर रही थी। अब कांग्रेस और वाम दल के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उनके भी इस अनुपात को देखा जायेगा कि वह कितने स्थान पर दूसरे नंबर पर रहे हैं।
- चौथा: एक चर्चा ये भी है कि जदयू और राजद 15-15 सीटों पर लड़ेंगे और गठबंधन में शामिल कांग्रेस को 5 , माले को 3 और भाकपा और माकपा को एक-एक लोकसभा सीट मिलेगी। हालांकि जेडीयू का कहना है कि इंडिया गठबंधन की लड़ाई भाजपा से है। इसलिए सीटों के बंटवारे में कोई परेशानी नहीं होगी। सीट बंटवारे के मामले में बिहार रोल मॉडल बनेगा।
