पुलिस में किसी स्निफर डॉग की भर्ती तब होती है, जब वह सिर्फ छह महीने का होता है। उसे पुणे में करीब नौ महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। उनकी परवरिश में सरकार बहुत रकम खर्च करती है। इसके लिए खास बजट बनाया गया है। पुलिस के स्निफर डॉग्स को सुबह दूध और बिस्कुट दिया जाता है। लंच और डिनर उनका एकदम अलग तरह का होता है। उनका हैंडलर बिना हड्डी का 750 ग्राम मटन निकालते हैं। इस मटन को फिर लौकी, चुकंदर, गाजर और गोभी के साथ मिक्स कर दिया जाता है। इसमें 250 ग्राम राइस भी मिलाया जाता है और फिर इन डॉग्स को दिया जाता है। इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि उनके खाने में नमक बिल्कुल भी न हो। एक हैंडलर आनंद देवर्डेकर ने एनबीटी से कहा कि नमक न देने की कहानी के पीछे एक संदेश होता है कि इंसान दूसरे का नमक खाकर उसके अहसान में दब जाता है, पर पुलिस के कुत्ते हमारा नमक खाए बिना भी हमारे और देश के प्रति कितने वफादार रहते हैं।
