चंद्रमा की सतह पर 54 साल से पड़ा है एक सीक्रेट यंत्र, आज भी कर रहा है काम, जानें पूरी कहानी
Updated on
23-08-2023 01:25 PM
फ्लोरिडा: भारत के चंद्रयान 3 पर दुनियाभर की नजरें लगी हैं। चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान लैंडिंग के लिए तैयार है। इस मिशन के साथ ही 54 साल पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अपोलो 11 भी याद आने लगा है। 20 जुलाई 1969 को नासा ने अपोलो 11 को चांद पर उतारा था। अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग इस मिशन के कमांडर थे। उनके साथ बज आल्ड्रिन भी चांद पर गए थे। दोनों जब चांद पर उतरे थे तो उन्होंने एक ऐसी डिवाइस वहां पर फिट की थी जो आज तक काम कर रही है। जानिए इसके बारे में सबकुछ।
क्या है यह डिवाइस जो डिवाइस नील आर्मस्ट्रॉन्ग और आल्ड्रिन ने फिट की थी उसे 'रेट्रोरिफ्लेक्टर' के तौर पर जाना जाता है। यह एक लेजर रेंजिंग रेट्रोरिफ्लेक्टर (LRRR) है। यह रेट्रोरिफ्लेक्टर, ऐरे को पृथ्वी की तरफ लक्ष्य रखने के मकसद से वहां पर फिट किया गया था। इसे फ्यूज्ड सिलिका के क्यूब्स से बनाया गया था। पृथ्वी से चंद्रमा पर भेजी गई लेजर-रेंजिंग किरणें को इस एलआरआर द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इससे वैज्ञानिकों को चांद और धरती के बीच की दूरी की सटीक माप करने में मदद मिलती है। दोनों के बीच की दूरी की गणना धरती पर लौटने वाली रोशनी बहुत छोटी पल्स के लिए जरूरी समय को मापकर की जाती है।
क्या है इसका काम जर्नल साइंस के एक आर्टिकल के मुताबिक यह माप इतना सटीक हो सकता है कि वास्तविक आंकड़े से अधिकतम अंतर करीब छह इंच तक हो सकता है। मार्च 1970 में आए साइंटिफिक अमेरिकन के इश्यू में जेम्स फॉलर और जोसेफ वाम्लर ने लिखा था कि महत्वपूर्ण है कि किसी विशेष क्षण में पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की पूर्ण दूरी नहीं है, बल्कि महीनों और वर्षों की अवधि में छह इंच या उससे बेहतर सटीकता के साथ मापी गई दूरी का अलग होना है। कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने के लिए इस तरह की विविधताओं का अध्ययन किया जा सकता है। ' फॉलर को एलआरआरआर के आइडिया का क्रेडिट दिया जाता है। जब खो गई डिवाइस एलआरआरआर को चंद्रमा पर रखा गया था। जबकि चार और रेट्रोरिफ्लेक्टर भी पृथ्वी पर रखे गए थे। इनमें से तीन अमेरिका के अपोलो मिशन ने रखे थे जबकि बाकी सोवियत संघ के लूना मिशन ने स्थापित किए थे। सोवियत संघ के लूनोखोद1 यानी लूना-1 ने पहला रेट्रोरिफ्लेक्टर रखा था। स्पेस.कॉम के मुताबिक 17 नवंबर, 1970 को चंद्रमा पर रखा गया सोवियत संघ का रेट्रोरिफ्लेक्टर खो गया है। 14 सितंबर, 1971 के बाद से इसके बारे में नहीं सुना गया था। लेकिन साल 2010 में खगोल भौतिकीविदों ने इसे फिर से तलाश लिया था। साथ ही बाकी सभी रेट्रोरिफ्लेक्टर, अभी भी चालू हैं।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सेना ने कब्जे वाले कश्मीर की धरती खून से लाल कर दी है। असीम मुनीर के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर भयानक गोलीबारी की गई है। प्रदर्शन करने…
वॉशिंगटन: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात हुई है। इस मुलाकात में उन्होंने ईरान के मामले में हर विकल्प खुला रखने यानी सैन्य…
वॉशिंटगन: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से बने लगभग हर संवेदनशील रेडिएशन डिटेक्टर के लिए ऐसे स्टील का इस्तेमाल किया जाता है जो पहले परमाणु परीक्षण से पहले डूबे जहाजों से…
सिंगापुर: सिंगापुर के पूर्व राजनयिक किशोर महबूबानी ने कहा है कि भारत ने हालिया दशकों में, अपनी आजादी के बाद से काफी तरक्की की है। उन्होंने कहा कि चीन की…
मास्को: यूक्रेन से जंग के बीच रूस दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा हथियारों से लैस युद्धपोत Admiral Nakhimov पर 3 Ka-31 एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग हेलिकॉप्टर तैनात कर सकता…
काठमांडू: नेपाल ने भारत से अनुरोध किया है कि वह नेपाली नागरिकों के बॉयोमेट्रिक राष्ट्रीय पहचान पत्र (Natioanl Identity Card) को यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता दे। राजनयिक चैनलों…
तेहरान: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले का ईरान का दांव कामयाब होता दिख रहा है। पिछले तीन दिनों के मैरीटाइम डेटा से पता चलता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से…