अन्ना सालुंके, वो एक्टर जिसने पहली बार राम-सीता दोनों का निभाया किरदार, 106 साल पहले आई थी फिल्म
Updated on
10-10-2023 01:59 PM
हिंदी सिनेमा का इतिहास बहुत दिलचस्प रहा है। माना जाता है कि भारत में सिनेमा की शुरुआत साल 1913 में हुई, जब भारत की पहली मूक फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' रिलीज हुई थी। इंडिया की पहली मूवी के लीड एक्टर थे अन्ना सालुंके और उन्होंने मर्द होते हुए फिल्म में राजा हरिश्चंद्र की पत्नी रानी तारामती का किरदार निभाया था। क्या आप जानते हैं कि वो मुंबई में एक रेस्त्रा में कुक और वेटर का काम करते थे। आखिर फिल्म का डायरेक्टर और प्रोड्यूसर दादासाहेब फाल्के ने उन्हें एक्ट्रेस बनने के लिए ऑफर क्यों दिया, ये बहुत ही दिलचस्प किस्सा है। आइये आज हमारे 'ट्यूजडे तड़का' सेगमेंट में इनके बारे में जानते हैं, जिन्होंने इंडियन सिनेमा में पहली बार पर्दे पर डबल रोल भी निभाया था, वो भी राम और सीता दोनों का।
जिस रेस्त्रां में अन्ना सालुंके काम करते थे, वहां 'राजा हरिश्चंद्र' के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर धुंडीराज गोविंद फाल्के (दादासाहेब फाल्के) अक्सर आते थे। उन्हें अपनी फिल्म के लिए ऐसी कोई महिला नहीं मिली, जो एक्टिंग करने के लिए हामी भरे। यहां तक कि उन्होंने वेश्याओं और नाचने वाली लड़कियों से भी बात की, लेकिन उन्होंने भी इनकार कर दिया।
पतले हाथ देखकर अन्ना सालुंके को दिया ऑफर
निराश दादसाहेब फाल्के की नजर रेस्त्रां में अन्ना सालुंके पर पड़ी। उनकी शारीरिक बनावट और पतले हाथ देख उन्होंने अन्ना को फिल्म का ऑफर दिया। उस समय अन्ना 10 रुपये महीने की सैलरी पर काम करते थे, फाल्के ने उन्हें 15 रुपये देने की पेशकश की और वो मान गए और इस तरह एक कुक/वेटर भारत की पहली फिल्म का 'हीरोइन' बन गया। वो पहले मर्द थे, जिन्होंने बड़े पर्दे पर पहली बार औरत का रोल निभाया था।
इंडियन सिनेमा में डबल रोल करने वाले पहले एक्टर
Raja Harishchandra के बाद अन्ना सालुंके को एक बार फिर इतिहास रचने का मौका मिला। उन्होंने आज से करीब 106 साल पहले 1917 में एक और फिल्म की, जिसका नाम था 'लंका दहन'। इस मूवी में उन्होंने हीरो (राम) और हीरोइन (सीता) दोनों का रोल निभाया था। ऐसा करने वाले वो पहले एक्टर थे।
सीता बने अन्ना सालुंके के दिखते थे बाइसेप्स
हालांकि, तब तक अन्ना सालुंके की बॉडी मस्कुलर हो गई थी और देवी सीता का किरदार निभाते हुए भी दर्शक उनके बाइसेप्स को देख सकते थे।
सिनेमैटोग्राफर भी थे अन्ना सालुंके
एक्टर होने के साथ-साथ अन्ना सालुंके सिनेमैटोग्राफर भी थे। उन्होंने साल 1922 में 'सत्यनारायण' और 1923 में फाल्के की 'बुद्ध देव' में काम किया था। इन दोनों ही फिल्मों में सिनेमैटोग्राफी भी की थी। बाद में अन्ना सालुंके ने एक्टिंग करियर छोड़ दिया और पूरी तरह से सिनेमैटोग्राफी पर फोकस किया। उन्होंने बतौर डायरेक्टर भी अपनी किस्मत आजमाई। बतौर सिनेमैटोग्राफर अन्ना की आखिरी मूवी साल 1931 में रिलीज हुई।
27 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
अन्ना सालुंके ने 1913 से 1931 तक अपने 18 साल के फिल्मी करियर के दौरान कई फिल्मों में एक्टिंग की, जिनमें महिला भूमिका वाली पांच फिल्में शामिल थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महज 27 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई थी।
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