बिहार से खाली हाथ मुंबई आए, 9 बिजनस फेल हुए, फिर भी नहीं मानी हार, जानिए अनिल अग्रवाल की कहानी
Updated on
21-10-2023 03:33 PM
नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर आपने वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) को आपने काफी देखा होगा। एक बिहारी सौ पर भारी वाली कहावत इन पर सटीक बैठती है। इनकी सफलता की कहानी काफी प्रेरणादायी है। वेदांता से पहले अग्रवाल ने 9 बिजनस शुरू किये थे। लेकिन सभी फेल हो गए। इसके बाद उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज की स्थापना की और आज यह हजारों करोड़ की कंपनी है। अनिल अग्रवाल देश के सबसे सफल कारोबारियों में से एक माने जाते हैं। खास बात यह है कि अग्रवाल कभी कॉलेज नहीं गए। आइए जानते हैं कि उनकी सफलता की कहानी कैसी रही है।
20 साल की उम्र में बिहार छोड़ मुंबई आए
अनिल अग्रवाल बिहारी में पटना के रहने वाले हैं। उन्होंने काफी कम उम्र (20 साल) में बिहार छोड़ दिया था और खाली हाथ मुंबई आ गए थे। उनके पास उस समय केवल एक टिफिन बॉक्स था। मुंबई में आकर उन्होंने पहली बार पीली टैक्सी और डबल डेकर बस देखी थी। यहां उन्होंने जमकर मेहनत की। साल 1970 में उन्होंने कबाड़ के धंधे से अपने कारोबारी करियर की शुरुआत की। उन्होंने अपनी पहली कंपनी की स्थापना की, जिससे उन्हें अच्छी-खासी कमाई हुई।
9 बिजनस शुरू किये, सभी फेल
इसके बाद साल 1976 में अग्रवाल ने शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी को खरीदा। लेकिन बाद में धंधा नहीं चला तो उनके पास कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे। इसके बाद अनिल अग्रवाल ने 9 अलग-अलग बिजनस शुरू किये, लेकिन सभी फेल हो गए। अग्रवाल कहते हैं कि उन्होंने अपने शुरुआती 20-30 साल संघर्ष में बिताए। कैंब्रिज में अपने एक संबोधन में अग्रवाल ने बताया था कि वे वर्षों तक डिप्रेशन में रहे थे। वे लगातार कोशिश करते रहे लेकिन सफलता नहीं मिली।
कॉपर रिफाइन का काम शुरू किया
इसके बाद साल 1986 में भारत सरकार ने टेलीफोन केबल बनाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को मंजूरी दे दी। इससे पहले 1980 में अग्रवाल ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को खरीद लिया था। इसके बाद साल 1990 में अग्रवाल ने कॉपर रिफाइंड का काम शुरू किया। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज देश की पहली ऐसी प्राइवेट कंपनी थी, जो कॉपर रिफाइन करने का काम करती थी। इसके बाद अग्रवाल लगातार सफलता की नई कहानी लिखते चले गए।
9 बिजनस शुरू किये, सभी फेल
इसके बाद साल 1976 में अग्रवाल ने शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी को खरीदा। लेकिन बाद में धंधा नहीं चला तो उनके पास कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे। इसके बाद अनिल अग्रवाल ने 9 अलग-अलग बिजनस शुरू किये, लेकिन सभी फेल हो गए। अग्रवाल कहते हैं कि उन्होंने अपने शुरुआती 20-30 साल संघर्ष में बिताए। कैंब्रिज में अपने एक संबोधन में अग्रवाल ने बताया था कि वे वर्षों तक डिप्रेशन में रहे थे। वे लगातार कोशिश करते रहे लेकिन सफलता नहीं मिली।
कॉपर रिफाइन का काम शुरू किया
इसके बाद साल 1986 में भारत सरकार ने टेलीफोन केबल बनाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को मंजूरी दे दी। इससे पहले 1980 में अग्रवाल ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को खरीद लिया था। इसके बाद साल 1990 में अग्रवाल ने कॉपर रिफाइंड का काम शुरू किया। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज देश की पहली ऐसी प्राइवेट कंपनी थी, जो कॉपर रिफाइन करने का काम करती थी। इसके बाद अग्रवाल लगातार सफलता की नई कहानी लिखते चले गए।
नई दिल्ली: लोन पर स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर है। अगर उन्होंने लोन की किस्त नहीं चुकाई तो उनके डिवाइस पूरी तरह लॉक किए जा…
मुंबई: स्वदेश में ही इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रही कंपनी आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (RRP Electronics) की तरफ से बड़ी खबर आई है। कंपनी ने बताया है कि…
नई दिल्ली: कांवड़ यात्रा के दौरान गाजियाबाद और मेरठ के बीच सड़क यातायात प्रभावित होने का असर नमो भारत ट्रेन की यात्रियों की संख्या पर भी दिख रहा है। इस…
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से बैंकों और फाइनैंशल टेक्नॉलजी कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी…
नई दिल्ली: शेयर बाजार के नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) ने ट्रेडर्स की नींद उड़ा दी है। आखिरी वक्त में कीमतों में होने वाले अचानक और बड़े बदलावों से निवेशकों…
नई दिल्ली: लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को हरी झंडी दे दी है। इससे सरकार को UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने…