अमेरिका से मीलों आगे है चीन, चांद का कोना-कोना छान मारा, बना रखे हैं अनोखे रिकॉर्ड
Updated on
22-08-2023 01:03 PM
बीजिंग: चीन ने 1970 में अपनी पहली सैटेलाइट को लॉन्च किया था। जब चीन यह कर रहा था, उससे पहले अमेरिका इंसानों को चांद तक पहुंचा चुका था। लेकिन आज के समय चीन अपने स्पेस प्रोग्राम के जरिए दुनिया को कड़ी टक्कर दे रहा है। चीन ने चांद से जुड़ा अपना सबसे पहला मिशन 2007 में लॉन्च किया था। लेकिन अब चीन चांद से जुड़े मिशन में काफी आगे निकल चुका है। चीन ने चांद पर कई ऐसे कारनामे किए हैं, जो अभी तक अमेरिका भी नहीं कर पाया। आइए जानें चीन के चांद मिशन के बारे में।
चीन के लूनर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम (CLEP) को चांग'ई प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है। चांग'ई चीन में चांद की देवी को कहा जाता है। चीन ने अब तक पांच चांग'ई मिशन लॉन्च किए हैं, जिनमें उसने बड़ी कामयाबी हासिल की है। चीन ने इस प्रोग्राम में चांद का चक्कर लगाने वाले ऑर्बिटर, उस पर उतरने वाले लैंडर और रोवर लॉन्च किए हैं। इसके अलावा चीन एक मिशन के जरिए चांद का नमूना भी धरती पर लाने में कामयाब रहा है। चीन ने 2007 में पहला ऑर्बिटर लॉन्च किया था। दूसरा ऑर्बिटर चीन ने 2010 में लॉन्च किया था।
चांद पर उतारा लैंडर
चांग'ई-3 मिशन के जरिए चीन पहली बार चांद की सतह पर उतरा। 1 दिसंबर 2013 को चीन के अंतरिक्ष यान ने चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की। वहीं चांग'ई-4 के जरिए वह दूसरी बार चांद पर उतरा। चांग'ई-4 मिशन 7 दिसंबर 2018 को लॉन्च किया गया जो 3 जनवरी 2019 को चांद पर उतरा। लेकिन इसने एक रिकॉर्ड बनाया। चीन चांद के पिछले हिस्से पर उतरने वाला पहला और एकमात्र देश बना। चांग'ई-4 मिशन का लैंडर अभी भी काम कर रहा है। इसके साथ एक रेडियो आइसोटोप भेजा गया था, जो इसे गर्म रखता है।
चांद पर उगाए पौधे
चांग'ई-4 मिशन के जरिए चीन ने एक और कारनामा किया था जो आज तक अमेरिका भी नहीं कर सका है। चांग'ई-4 के साथ एक छोटा प्रयोग बॉक्स भेजा गया था, जिसे लूनर माइक्रो इकोसिस्टम कहते हैं। इसमें कपास और आलू समेत कई बीज थे। चीन के भेजे यह बीज अंकुरित हुए। इसके जरिए चीन यह जानने में सफल हुआ कि आखिर चांद पर कैसे पौधे उगाए जा सकते हैं। वहीं, चांग'ई-5 मिशन को 2020 में लॉन्च किया गया था, जो चांद के चट्टान का 1731 ग्राम अपने साथ वापस लाया।
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