बाज नहीं आ रहा चीन जी-20 से पहले जारी किया नया नक्शा, लद्दाख और अरुणाचल को बताया अपना
Updated on
29-08-2023 02:19 PM
बीजिंग: भारत में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले चीन ने पंगा लेने का फैसला किया है। दूसरों की जमीन कब्जाने वाले चीन ने एक बार फिर अपनी मानसिकता दुनिया के सामने दिखाई है। चीन ने अपना आधिकारिक नक्शा जारी किया है, जिसमें उसने भारत के लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया है। इसके साथ ही उसने दक्षिण चीन सागर में मौजूद टापुओं पर भी अपना दावा पेश किया है। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इसकी जानकारी दी है।
ग्लोबल टाइम्स ने एक्स पर जारी एक पोस्ट में लिखा, 'चीन के मानक मानचित्र का 2023 संस्करण आधिकारिक तौर पर सोमवार को जारी किया गया और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय की ओर से होस्ट किए गए मानक मानचित्र सेवा की वेबसाइट पर लॉन्च किया गया। यह मैप चीन और विश्व के विभिन्न देशों की राष्ट्रीय सीमाओं की रेखांकन विधि के आधार पर कंपाइल किया गया है।' चीन की ओर से यह नक्शा तब जारी किया गया है, जब हाल ही में पीएम मोदी और शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मिले थे।
चीन बॉर्डर के पास बना रहा गांव
इस बीच ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि चीन एलएसी के पास संवेदनशील इलाकों में गांव बनाने में लगा है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि चीन के जियाओकांग में पूर्वी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है। जबकि तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में ऐसे 628 गांव, तवांग में 30 और तुलुंग ला में 25 गांव के होने का अनुमान है। रणनीतिक दृष्टिकोण से तवांग अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर का एंट्री पॉइंट है। साथ ही जहां तक तिब्बतियों का सवाल है, इसका धार्मिक महत्व भी है।
भूटान के पास भी बना रहा बस्ती
तुलुंग ला का महत्व इसलिए ज्यादा है, क्योंकि 1975 में चीनियों ने असम राइफल्स की 4 टुकड़ियों पर घात लगाकर हमला किया था। चुमार के संवेदनशील इलाके में भी ऐसी बस्तियां देखने को मिली हैं। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पश्चिमी भूटान और उत्तरी भूटान के सामने भी निर्माण हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इन बस्तियों को गांवों के रूप में नहीं मानना चाहिए। इन सिर्फ चीन अपना दावा मजबूत करने के लिए बना रहा है।
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