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अमेरिका से चुपचाप अपना पैसा निकाल रहा चीन, कहां कर रहा निवेश, क्या है ड्रैगन का प्लान?

Updated on 12-02-2026 01:02 PM
नई दिल्ली: अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। पिछले कई साल से दोनों के बीच ट्रेड वॉर चल रहा है। इस बीच चीन अमेरिका के एसेट्स में चुपचाप अपना निवेश कम करने में लगा है। अमेरिका की ट्रेजरी, स्टॉक, एजेंसी, कॉरपोरेट और दूसरे बॉन्ड्स में चीन का निवेश अब घटकर 1.56 ट्रिलियन डॉलर रह गया है जो करीब 14 साल में सबसे कम है। इसमें अमेरिका की ट्रेजरी में बेल्जियम की होल्डिंग्स भी शामिल हैं। माना जाता है कि ये चीन के कस्टोडियल अकाउंट्स को रिप्रजेंट करते हैं।

अगर बेल्जियम की ट्रेजरी को हटा दिया जाए तो अमेरिकन एसेट्स में चीन की होल्डिंग्स 1.16 ट्रिलियन डॉलर रह गई है जो 2008 के बाद सबसे कम है। नवंबर में अमेरिका की ट्रेजरी में चीन की होल्डिंग्स 6.1 अरब डॉलर गिरकर 682.6 अरब डॉलर रह गई है। यह अक्तूबर 2008 के बाद सबसे कम है। चीन ने साथ ही अपने बैंकों को यूएस ट्रेजरी में अपनी होल्डिंग्स बेचने को कहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही चीन अमेरिका में अपना निवेश कम करने में लगा है।

चीन को गोल्ड रिजर्व

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन गुपचुप तरीके से अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है। हालांकि पिछले साल आधिकारिक रूप से उसने 27 टन गोल्ड खरीदा लेकिन जानकारों का कहना है कि यह खरीद करीब 270 टन की है। चीन इस तरह सोने की होर्डिंग कर रहा है कि जैसे कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है। आधिकारिक रूप से चीन के पास 2,304 टन सोने का भंडार है। हालांकि जानकारों का मानना है कि चीन के पास इससे कहीं ज्यादा सोना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर चीन को अगले कुछ दशक में दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी बननी है तो उसके पास 8,000 टन से अधिक सोना होना चाहिए।अभी दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका के पास सबसे ज्यादा 8,133 टन सोना है जो उसके कुल रिजर्व का 78% है। पिछले 25 साल में अमेरिका के गोल्ड रिजर्व में ज्यादा अंतर नहीं आया है। यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश पर जर्मनी के पास 3,350 टन सोना है जो उसके कुल रिजर्व का 78% है। इटली के पास 2,452 टन सोना है जो उसके कुल रिजर्व का 75% है। इसी तरह फ्रांस के पास 2,437 टन और रूस के पास 2,330 टन सोना है। इसके बाद चीन का नंबर है। लेकिन उसके कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी करीब 7% है जबकि ग्लोबल एवरेज 22% है।

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