जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारी यानी मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर की घोषणा ने चीन की मंशा पर बड़ा चोट किया है। तीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव यानी बीआरआई को इस कॉरिडोर से बड़ा झटका लगा है। चीन दूसरे देशों में रेल, सड़क, पोर्ट बनाकर एक तरह का कॉरिडोर बनाता है और इसी बहाने उन देशों की सीमाओं में हस्तक्षेप भी करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर से चीन की इस मंशा को चोट पहुंचेगी। इतना ही नहीं इस कॉरिडोर से भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार और संपर्क दोनों बढ़ेगा। जिसका असर चीन के व्यापर पर चढ़ेगा। आने वाले सालों में भारत और यूरोप से चीन का निर्यात घटेगा।
भारत और अमेरिका के बीच 8300 करोड़ रुपये का रीन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट फंड बनाने पर सहमति बनी है। इस फंड का इस्तेमाल ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। बैटरी स्टोरेज और ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसका सबसे बुरा असर चीन के बैटरी, लीथियम मार्केट पर पड़ेगा। जी20 समिट में बायो फ्यूल अलायंस पर बनी सहमति भी चीन के लिए चुनौती है।