सामने बैठे थे चीन के मिनिस्टर, पीएम नरेंद्र मोदी ने खोल दी 'फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड' की पोल
Updated on
23-08-2023 01:57 PM
नई दिल्ली: करीब दो दशक तक चीन दुनिया की फैक्ट्री बना रहा। दुनिया की कंपनियों ने चीन में सस्ती कीमत पर सामान बनवाया और दोनों हाथों से कमाई की। लेकिन चीन पर अत्यधिक निर्भरता अब दुनिया के लिए भारी पड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने दुनिया से अपनी इस कमजोरी से बाहर निकलकर एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने का आह्वान किया है। मोदी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका में हैं। मंगलवार को उन्होंने जोहानसबर्ग में ब्रिक्स बिजनस फोरम में फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड यानी चीन की कलई खोलकर रख दी। मजेदार बात है कि मोदी जब यह बात कह रहे थे तो इस दौरान चीन के कॉमर्स मिनस्टर वांग वेनताओ भी मौजूद थे।
मोदी ने कहा, 'कोविड महामारी ने हमें सिखा दिया है कि दुनिया के एक लचीली और समावेशी सप्लाई चेन की जरूरत है। इसके लिए भरोसा और पारदर्शिता सबसे अहम है। हम दुनिया की बेहतरी में योगदान देने के लिए एकदूसरे की ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर ग्लोबल साउथ में इसकी अहम भूमिका हो सकती है।' चीन इस ब्रिक्स समिट का इस्तेमाल पश्चिमी देशों के दबदबे वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के खिलाफ करना चाहता है। भारत और चीन के बीच पिछले कई साल से सीमा पर तनाव चल रहा है। इस कारण दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है। इस समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी हिस्सा ले रहे हैं। मोदी और जिनपिंग के बीच वन टु वन मीटिंग की उम्मीद की जा रही है।
कैसे नींद से जागी दुनिया
चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक बेहतर सप्लाई चेन बनाने की कोशिश में लगे हैं। अभी दुनिया के बाजारों में चीन में बने सामान का दबदबा है। लेकिन कोरोना महामारी के बाद दुनिया जैसे नींद से जागी है। कोरोना काल में कई देशों को मास्क और टेस्ट किट्स समेत कई चीजों की सप्लाई बाधित हुई थी। यही वजह है कि अब कई देशों ने चीन पर निर्भरता कम करने का फैसला किया है और अपने ही देश में प्रॉडक्शन बढ़ाना शुरू कर दिया है। भारत भी इसमें शामिल है। मोदी सरकार ने देश में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए के लिए प्रॉडक्शन लिंक्ड स्कीम जैसे कई उपाय किए हैं।
भारत ने हाल में यूएई और फ्रांस के साथ यूपीआई के इस्तेमाल के लिए करार किए हैं। मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच भी इसी तरह की साझेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शंस हो रहे हैं। पीएम ने मेजबान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा की मौजूदगी में कहा कि उभरते देशों का ब्लॉक अहम भूमिका निभा सकता है और भारत आने वाले दिनों में ग्लोबल इकॉनमी का ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। ग्लोबल इकॉनमी की चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही बड़ी इकॉनमी है। जल्दी ही यह पांच ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी होगी। इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया का ग्रोथ इंजन बनेगा।
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