सपा के एजेंडे में रही है जातीय जनगणना
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान समाजवादी पार्टी गठबंधन ने सरकार बनने की स्थिति में जातीय जनगणना कराने की घोषणा की थी। इसे अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया था। सरकार बनने की स्थिति में तीन माह के भीतर जातीय जनगणना का वादा किया गया था। हालांकि, अखिलेश यादव का जातीय जनगणना का दांव चुनाव में काम नहीं कर पाया। इसके बाद से इस पर चर्चा मंद हो गई थी। अब बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़ों के सार्वजनिक किए जाने के बाद से यूपी में एक बार फिर इस पर चर्चा गरमाई है। जनवरी में रामचरितमानस के भीतर जातियों को लेकर लिखे गए दोहों का मामला उठाकर सपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने सियासत गरमाई। इसके बाद से जातीय जनगणना का मुद्दा भी उठने लगा।
सपा की ओर से जातीय जनगणना के मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्यभर में इसको लेकर अभियान चलाया गया। फरवरी में बजट सत्र के दौरान भी यूपी में जातीय जनगणना का मुद्दा विधानसभा के पटल पर उठा। जातीय जनगणना को लेकर बसपा प्रमुख मायावती का भी बयान आया है। उनका कहना है कि बसपा जातीय जनगणना की प्रबल समर्थक है। इसके लिए केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए।
