'हर शिक्षक पांच बच्चों को गोद ले', जानिए केके पाठक के इस नए फॉर्म्युले की बड़ी वजह
Updated on
14-11-2023 02:02 PM
पटना: बिहार में कुछ समय पहले तक सरकारी स्कूलों की कल्पना करने पर एक अलग ही तरह की तस्वीर उभरती थी। जहां मास्टर जी कुर्सी पर ऊंघ रहे हैं और बच्चे क्लास में पढ़ाई के बजाए शोर मचा रहे हैं। किसी स्कूल में भैंसों का तबेला दिखता था तो किसी स्कूल के बाहर भूसों का ढेर दिखता था। लेकिन एक फिल्म आई थी 'सिर्फ एक बंदा काफी है।' लेकिन जैसे ही शिक्षा विभाग में कड़क आईएएस केके पाठक ने अपर मुख्य सचिव का जिम्मा संभाला, उन्होंने बदलाव शुरू कर दिए। उन्होंने इसकी शुरुआत ग्राउंड यानी जमीनी स्तर से की। पहले उन्होंने स्कूलों की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान दिया। इसके बाद शिक्षकों को समय पर स्कूल आने और पढ़ाने का टास्क दिया। उनकी कड़ई के आगे किसी की चली भी नहीं। अब केके पाठक ने कुछ टीचरों को एक नया मिशन दे दिया है।
हर टीचर पांच बच्चों को गोद ले- केके पाठक
कुछ दिन पहले ही केके पाठक बेगूसराय के दौरे पर थे। इस दौरान रात में ही उन्होंने शिक्षकों की क्लास लगाई थी। यहां तक कहा था कि अगर टीचरों को गांव में पढ़ाना पसंद नहीं तो ये नौकरी उनके लिए नहीं है, वे इसे तत्काल छोड़ दें। इसी कड़ी में केके पाठक बेगूसराय के एक स्कूल में पहुंचे। लेकिन इसी दौरान वो गुस्से में आ गए। उन्होंने टीचरों को उनके कर्तव्य की याद दिलाई और कहा कि अगर वो 5-5 बच्चों को भी 'गोद' ले लें तो इनका भविष्य संवर जाएगा।
केके पाठक का नया फॉर्म्युला
केके पाठक ने निरीक्षण के दौरान ही स्कूल में टीचरों से उनकी तादाद के बारे में पूछा। फिर उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 20 टीचर हैं तो हर टीचर पांच-पांच बच्चों को गोद ले सकता है। गोद लेने का मतलब ये कि इन बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेवारी उस शिक्षक पर होगी। इतना ही नहीं, रोष में भरे केके पाठक ने कहा कि 'यहां शिक्षकों की पूरी सेना है, तनख्वाह लेते हैं तो 40 हजार करोड़ तक का बजट रहता है। मैं इसी स्कूल से 40 उन छात्रों को निकाल सकता हूं जो ठीक से सबजेक्ट पढ़ तक नहीं सकते। गुस्सा तो तब आता है जब बच्चे किताब की एक लाइन नहीं पढ़ पाते। आखिर अब तक आप लोगों ने किया ही क्या है, जो ये हाल है।'
'सिर्फ एक बंदा काफी है'
ये सच है कि केके पाठक गुस्सैल हैं। गुस्से में कई बार वो अनर्गल भी बोल जाते हैं, इसके वीडियो भी वायरल हुए हैं। लेकिन गांधी मैदान में सीएम नीतीश के संबोधन के दौरान उनका नाम आते ही नवनियुक्त शिक्षकों ने ताली की गड़गड़ाहट से माहौल गुंजा दिया। हम केके पाठक की यूं ही तारीफ नहीं कर रहे, एक अकेला शख्स उस व्यवस्था को बदलने निकला है जो काफी समय से बदहाल थी। इस पर न किसी अफसर ने ध्यान दिया और न किसी मंत्री ने। लेकिन एक बंदे ने दिखा दिया कि अगर खुद से ठान लिया जाए तो सिस्टम क्या, सिस्टम के अंदर तक घुस कर एक-एक 'मशीन' के पेच-पुर्जे ठीक कर दे।
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