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लोन लेना सस्ता हुआ या महंगा? रिजर्व बैंक ने बता दिया रेपो रेट, जानें क्या कहा गवर्नर ने

Updated on 06-02-2026 12:20 PM
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के बाद इसकी जानकारी दी। रेपो रेट अभी 5.25% पर ही रहेगा। हाल में आए केंद्रीय बजट के बाद एमपीसी की यह पहली बैठक थी। बाजार, कर्जदार और निवेशक सभी इस बात पर नजरें टिकाए हुए थे कि ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था को लेकर क्या संकेत मिलते हैं। रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से लोन दरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

आरबीआई एमपीसी की यह तीन दिन की समीक्षा बैठक 4 फरवरी को शुरू हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। ज्यादातर अर्थशास्त्री और वित्तीय विश्लेषक यही मान रहे थे कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। दिसंबर 2025 में इसमें 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती की गई थी, जिससे पता चलता है कि रिजर्व बैंक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना चाहता है। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से बाहरी चुनौतियां बढ़ी हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि हाल के व्यापारिक समझौतों का सफल समापन आर्थिक दृष्टिकोण के लिए अच्छा संकेत है। कुल मिलाकर, उन्होंने कहा, निकट अवधि में घरेलू मुद्रास्फीति और विकास का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। रेपो दर अपरिवर्तित रहने के साथ, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर 5 प्रतिशत पर बनी हुई है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.5 प्रतिशत पर जारी हैं।

एक साल में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती

पिछले एक साल में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। कई विशेषज्ञों का मानना था कि रिजर्व बैंक अब पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखेगा और आगे कोई भी कटौती करने से पहले 'देखें और इंतजार करें' की रणनीति अपनाएगा। बड़े बैंकों की रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि दुनिया भर में अनिश्चितता, विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और सरकारी बॉन्ड यील्ड का स्थिर रहना, इन सब वजहों से केंद्रीय बैंक मुख्य नीतिगत दर में तुरंत बदलाव करने को लेकर थोड़ा सतर्क रहा।

क्यों महत्वपूर्ण थी यह बैठक?

फरवरी की एमपीसी बैठक ऐसे समय हुई जब हाल ही में केंद्रीय बजट 2026 पेश हुआ है और भारत-अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता भी हुआ है। ये दोनों ही चीजें आर्थिक विकास और महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, बाजार के जानकारों ने सिर्फ रेपो रेट के फैसले पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि इस बात पर भी नजर रखी कि रिजर्व बैंक बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) को कैसे संभालेगा और महंगाई व विकास के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

क्या है रेपो रेट?

  • रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को पैसा उधार देता है। यह मौद्रिक नीति का एक बड़ा जरिया है।
  • जब रेपो रेट कम होता है तो ग्राहकों और कंपनियों के लिए बैंकों से लोन लेना सस्ता हो जाता है।
  • अगर एमपीसी दरों को स्थिर रखती है तो इसका मतलब है कि रिजर्व मौजूदा महंगाई और विकास की स्थिति से संतुष्ट है और कोई भी अगला कदम उठाने से पहले पिछले कटौतियों के असर को देखना चाहता है।

अभी तक कितनी हुई कटौती?

  • दिसंबर 2025 में एमपीसी ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती करके इसे 5.25% कर दिया था और अपनी तटस्थ (neutral) नीतिगत मंजूरी बनाए रखी थी। इससे पहले भी दरें घटाई गई थीं।
  • पूरे 2025 के दौरान रिजर्व बैंक ने विकास को सहारा देने और वित्तीय स्थितियों को आसान बनाने के लिए कई बैठकों में धीरे-धीरे रेपो रेट में कुल 100 bps की कटौती की थी।
  • यह कटौती ऐसे समय में हुई थी जब महंगाई कम हो रही थी और विकास दर ठीक-ठाक थी। इन परिस्थितियों ने केंद्रीय बैंक को वित्तीय स्थिरता पर नजर रखते हुए नीति को आसान बनाने का मौका दिया था।

बैंकों पर क्या पड़ रहा असर?

पिछली दर कटौतियों से पॉलिसी रेट कम हुआ है, लेकिन बैंकों की कर्ज दरों पर इसका असर धीरे-धीरे हुआ है। नुवामा रिसर्च ने कहा कि बैंकों की कर्ज दरों पर इसका असर दिख रहा है और बॉन्ड यील्ड (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) काफी स्थिर रहे हैं। रिजर्व ने पहले भी अर्थव्यवस्था को 'गोल्डीलॉक्स फेज' (यानी, न बहुत गर्म, न बहुत ठंडा, बल्कि एकदम सही स्थिति) में बताया है।

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