मिस-सेलिंग पर कितना मिलेगा रिफंड? अगर आप भी हैं शिकार तो जान लीजिए पूरी प्रोसेस
Updated on
13-02-2026 12:56 PM
नई दिल्ली: कई बार ऐसा होता है कि कोई बैंक या वित्तीय संस्थान किसी ग्राहक को गलत जानकारी देकर या बहला-फुसलाकर कोई स्कीम या प्रोडक्ट बेच देता है। इससे ग्राहक को पैसे का तो नुकसान होता ही है, साथ ही वह मानसिक तौर पर भी परेशान होता है। अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे संस्थानों पर शिकंजा कस रहा है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को ऑल इंडिया फाइनैंशल इंस्टीट्यूशंस (AIFIs) के लिए विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री से जुड़े कड़े निर्देश जारी किए हैं।
क्या है ड्राफ्ट में? इसमें गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने (मिस-सेलिंग) पर संस्थानों को सजा देने, डार्क पैटर्न्स (धोखेबाज डिजाइन) पर रोक लगाने। जबरन दूसरा प्रोडक्ट चिपकाने जैसी चीजों पर रोक लगाने की बात कही गई है।आरबीआईका कहना है कि ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो जाएंगे।
'मिस-सेलिंग' क्या है? नियमों के अनुसार, अगर कोई संस्थान अपना या किसी दूसरी कंपनी का प्रोडक्ट इन तरीकों से बेचता है, तो उसे मिस-सेलिंग माना जाएगा। ऐसा प्रोडक्ट बेचना जो ग्राहक की प्रोफाइल के हिसाब से सही नहीं है, भले ही ग्राहक ने इसके लिए हां कह दी हो। सही या पूरी जानकारी दिए बिना या गलत जानकारी देकर प्रोडक्ट बेचना। ग्राहक की साफ तौर पर दी गई मर्जी के बिना उसे प्रोडक्ट बेचना। ग्राहक ने जो प्रोडक्ट मांगा है, उसके साथ जबरदस्ती कोई दूसरा प्रोडक्ट भी लेना अनिवार्य कर देना।
मिस-सेलिंग पर क्या करें? अगर आपको गलत तरीके से कोई प्रोडक्ट बेचा गया है, तो आप इसकी शिकायत उस संस्थान (AIFI) में कर सकते हैं। यह शिकायत तय समय सीमा के भीतर करनी होगी। अगर कोई समय सीमा तय नहीं है, तो नियम और शर्तों (T&C) की साइन की हुई कॉपी मिलने के 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
कितना रिफंड मिलेगा? ET के मुताबिक, अगर यह साबित हो जाता है कि ग्राहक को गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचा गया है, तो संस्थान को ग्राहक द्वारा चुकाया गया पूरा पैसा (100% रिफंड) वापस करना होगा। साथ ही, संस्थान को ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।
संस्थानों को क्या करना होगा? संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी नीतियां ऐसी न हों जो कर्मचारियों पर प्रोडक्ट बेचने का दबाव डालें। जैसे, बिक्री के लिए मुकाबले करवाना या हफ्ते/महीने के कुछ दिन टारगेट सेल के लिए तय करना आदि। बाहर की कंपनियों के प्रोडक्ट बेचने वाले कर्मचारियों को उन कंपनियों से कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट कमीशन (इंसेंटिव) नहीं मिलना चाहिए। अपने प्रोडक्ट के साथ दूसरी कंपनी का प्रोडक्ट जबरन नहीं बेच सकेगा। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ऐप या वेबसाइट के इंटरफेस पर कोई डार्क पैटर्न (धोखा देने वाला डिजाइन) न हो। इनकी समय-समय पर जांच और
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