सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अभिसार बिल्डवेल मामले में अप्रैल में फैसला सुनाया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि आईटी कानून की धारा 153-ए के तहत इनकम टैक्स अधिकारी रिएसेसमेंट प्रॉसीडिंग के दौरान किसी टैक्सपेयर्स की इनकम में कोई एडीशन नहीं कर सकते हैं। इसके लिए उनके पास ठोस सबूत होना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने साथ ही कहा था कि आईटी कानून की धारा 147 और 148 के तहत रिएसेसमेंट को रिस्टोर किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीबीडीटी ने हाल में इनकम टैक्स अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी किए हैं।जोशी ने कहा कि कुछ ही टैक्सपेयर्स को राहत मिली है लेकिन बाकी के लिए स्थिति नहीं बदली है। यानी उन्हें कई साल तक मुकदमेबाजी में फंसे रहना पड़ सकता है। धारा 148 (पुरानी व्यवस्था) के तहत आईटी अधिकारी छह साल पुराने मामलों के खोल सकता है। फाइनेंस एक्ट, 2021 में जोड़ी गई धारा 148ए के तहत 10 साल पुराने मामलों को खोला जा सकता है। लेकिन इसके लिए सालाना इनकम 50 लाख रुपये से अधिक होनी चाहिए। सीबीडीटी के मुताबिक पुराने मामलों को खोलते समय यह लिमिट लागू होगी। यानी 50 लाख रुपये के कम सालाना इनकम वाले मामलों को नहीं खोला जाएगा।
