जावेद अख्तर ने यश चोपड़ा की 'जब तक है जान' के डायलॉग का उड़ाया मजाक, बोले- वो मॉर्डन लड़की का मतलब नहीं जानते
Updated on
26-07-2024 02:08 PM
'शोले' और 'मिस्टर इंडिया' जैसी मशहूर फिल्में लिखने वाले लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अक्सर हर मुद्दे पर अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए फेमस हैं। उन्होंने हाल ही में यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'जब तक है जान' में इस्तेमाल किए गए एक डायलॉग पर तंज कसा है। एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि मॉडर्न लड़कियों का कॉन्सेप्ट क्या है और फिल्मों में मजबूत महिला किरदारों की कमी क्यों हैं? इसके जवाब में जावेद अख्तर ने फिल्मों और डायलॉग्स का उदाहरण दिया। और समाज को दोषी ठहराया कि उनका कॉन्सेप्ट स्पष्ट नहीं, जिस कारण श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी टैलेंटड एक्ट्रेस को लार्जर-दैन-लाइफ रोल्स निभाने को नहीं मिला।
जावेद अख्तर ने 'वी आर युवा' के साथ इंटरव्यू में कहा, 'जब आप वह नहीं होते, जो आप होने का दिखावा करते हैं, तो आप उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। यश चोपड़ा की एक फिल्म थी, जब तक है जान। इस फिल्म में दो एक्ट्रेसेस थीं। इसमें एक डायलॉग था, मैं तभी शादी करूंगी, जब मैं दुनिया के हर नेशनैलिटी के लड़कों के साथ सो लूंगी। मेरा कहना है कि आप इतनी मेहनत क्यों करेंगी? आप सशक्त हैं, मॉडर्न हैं, आगे की सोचती हैं और मैं ये मानता हूं। आपतो इतनी मेहनत करने की जरूरत नहीं। दुनिया में बहुत सारे देश हैं। उस पर अपना समय बर्बाद मत करो। इस डायलॉग से आपका क्या मतलब है? और यह यश चोपड़ा की फिल्म है। क्योंकि वो दिखावा करना चाहते हैं कि एक सशक्त लड़की है और उन्हें ये मालूम ही नहीं कि एक सशक्त लड़की क्या होती है। इसलिए वह इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं।'
जावेद अख्तर ने श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित के लिए कहा
जावेद अख्तर ने आगे कहा, 'पहले एक भारतीय महिला, जिसका पति क्लब से नशे की हालत में घर आता और बिस्तर पर गिर जाता, तो वह उसके जूते उतारती। अब ऐसा नहीं है। आज एक मॉडर्न लड़की क्या है? मुझे लगता है कि लोगों को इसके बारे में अभी भी ठीक से जानकारी नहीं। समाज खुद इस कन्सेप्ट के बारे में स्पष्ट नहीं है। टैलेंटड एक्ट्रेस श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित, लगभग 10-13 सालों तक पर्दे पर राज करती रहूं। अपने पूरा करियर में उन्हें कभी-भी Larger Than Life रोल करने को नहीं मिला। लेकिन मीना कुमारी को एक रोल मिथा था। हालांकि उन्हें ये मिलने के पीछे वजह थी। क्योंकि उस समय नैतिकता स्पष्ट थी। नूतन को भी बंदिनी और सुजाता में ऐसे रोल्स मिले, जब वह भी इन सब चीजों से पीड़ित थीं।'
जावेद अख्तर ने बेटी जोया की फिल्मों का दिया उदाहरण
जावेद अख्तर ने ये दावा किया कि फिल्म इंडस्ट्री का आज भी कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं कि आधुनिक महिला क्या है, इसलिए वह श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी टैलेंटड एक्ट्रेसेस को एक भी वैसी भूमिका नहीं दे सके। उन्होंने कहा, 'रूढ़िवादी लोगों का ऐसा मनाना है कि अगर उन्होंने आधुनिक महिला के बारे में बताना शुरू किया तो वह अपना क्षेत्र गंवा बैठेंगे। उदारवादी लोग इस बात से डरते हैं कि अगर उन्होंने इसे परिभाषित किया तो, उनसे ज्यादा कोई दूसरा उदारवादी हो जाएगा। इसलिए दिक्कत यही है कि लोग अभी आधुनिक महिला के बारे में ज्यादा जानते ही नहीं। हालांकि जोया की फिल्मों में फीमेल कैरेक्टर आज भी महिलाएं हैं। चाहे वह लक बाय चांस हो या जिंदगी मिलेगी न दोबारा या फिर दिल धड़कने दो। वो सभी आधुनिक महिलाएं हैं।'
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