एमपी में 'सत्ता सिंहासन' का गलियारा है मालवा-निमाड़, ग्वालियर-चंबल का भी दबदबा, BJP-कांग्रेस में किसके बीच लड़ाई
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21-10-2023 01:33 PM
मालवा: मध्य प्रदेश में चुनावी बिसात सज चुकी है। बीजेपी अपनी योजनाओं पर पीएम मोदी के भरोसे मैदान में है। वहीं कांग्रेस ने राज्य में सरकार बनने पर जातीय जनगणना, 500 रुपये में गैस सिलेंडर जैसे वादे किए हैं। दोनों पार्टियों की नजर राज्य के महिला वोटर और ओबासी पर लगी है। हालांकि मध्य प्रदेश चुनाव में एक और प्रमुख पहलू है, जिस पर दोनों पार्टी काम कर रही हैं। दोनों पार्टियां क्षेत्रों में बांट कर वहां से स्थानीय मुद्दों को को उठाने की कोशिश कर रही है, लेकिन एमपी में कहा जाता है कि मालवा-निमाड़ में जो पार्टी जीतती है, वह राज्य में सरकार बनाती है। आइए जानते हैं यहां का समीकरण
मालवा-निमाड़
मालवा-निमाड़ 66 विधानसभा सीटों के साथ मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा क्षेत्र है। 2013 में बीजेपी ने 57 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को केवल नौ सीटें मिली थीं। हालांकि, 2018 में आदिवासी मतदाताओं के समर्थन से कांग्रेस ने 35 सीटें जीतीं। इससे बीजेपी 57 से घटकर 28 पर आ गई। जबकि तीन सीटें निर्दलीयों के पास गईं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में जनजातियों की मौजूदगी है। इस क्षेत्र में 22 एसटी आरक्षित सीटें हैं। 2018 में कांग्रेस ने 14 सीटें जीतीं, जिसमें बीजेपी ने सात सीटें जीतीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक, शीर्ष नेताओं ने इस क्षेत्र में प्रचार किया है।
महत्वपूर्ण नेता बीजेपी: कैलाश विजयवर्गीय (इंदौर 1) तुलसी सिलावट (सांवेर) कांग्रेसः जीतू पटवारी (राव), विक्रांत भूरिया (झाबुआ), हीरालाल अलावा (बदनावर)
ग्वालियर-चंबल
एमपी का ग्वालियर-चंबल, वह क्षेत्र है, जहां 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ लगभग क्लीन स्वीप किया था। कांग्रेस ने इस क्षेत्र की 34 विधानसभा सीटों में से 26 पर जीत हासिल की। हालांकि इस बार इस क्षेत्र में समीकरण बदले हुए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी के साथ हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस क्षेत्र में बसपा पार्टी का भी प्रभाव है। बसपा ने 2018 के चुनावों में दो सीटें जीती थीं।
ग्वालियर-चंबल
एमपी का ग्वालियर-चंबल, वह क्षेत्र है, जहां 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ लगभग क्लीन स्वीप किया था। कांग्रेस ने इस क्षेत्र की 34 विधानसभा सीटों में से 26 पर जीत हासिल की। हालांकि इस बार इस क्षेत्र में समीकरण बदले हुए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी के साथ हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस क्षेत्र में बसपा पार्टी का भी प्रभाव है। बसपा ने 2018 के चुनावों में दो सीटें जीती थीं।
महत्वपूर्ण नेता
बीजेपी: नरेंद्र एस तोमर (दिमनी), नरोत्तम मिश्रा (दतिया), प्रद्युम्न एस तोमर (ग्वालियर) कांग्रेस: गोविंद सिंह (लहार), जयवर्धन सिंह (राघौगढ़), रवींद्र सिंह तोमर (दिमनी)
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