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शेयर मार्केट में शाम 6 से रात 9 तक इवनिंग सेशन चलाना चाहता है NSE, जानिए इसके फायदे और नुकसान

Updated on 12-10-2023 02:51 PM
नई दिल्ली : नब्बे के दशक की शुरुआत में जब देश में उदारीकरण की हवा चल रही थी, तब शेयर बाजार (Share Market) की ट्रेडिंग एक बड़े हॉल में होती थी। जहां जॉबर्स और सब-ब्रोकर स्टॉक मार्केट रिंग में चिल्लाते थे। उस समय ट्रेडिंग दोपहर 12 बजे से दोपहर 2.30 बजे के बीच होती थी। हालांकि, यह कहा नहीं जा सकता कि रिंग में उस तरह की भाग-दौड़, दमखम के साथ चिल्लाना आदि लंबे समय तक चलाया जा सकता था। स्क्रीन-बेस्ड ट्रेडिंग के आने के साथ ही ट्रेडिंग का टाइम बढ़ाकर सुबह 9.15 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक कर दिया गया। कई लोगों के लिए यह एक लग्जरी था, तो कुछ ने सोचा कि यह उबाऊ हो सकता है। लेकिन अब, इक्विटी डेरिवेटिव में ट्रेडिंग (trading in equity derivatives) को मध्यरात्रि तक बढ़ाने की बात हो रही है।

F&O के लिए आ सकता है इवनिंग सेशन


बिजनस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज NSE, स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (Futures and Options) के लिए शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक एक इवनिंग सेशन शुरू करने के लिए सेबी से अनुमति मांग रहा है। यदि ट्रेडर्स इस सेशन में उत्साह के साथ भाग लेते हैं, तो स्टॉक डेरिवेटिव को शामिल करने के साथ ट्रेडिंग का समय रात 11.55 बजे तक बढ़ाया जा सकता है।

क्या है फायदा-नुकसान?


9 से 6 नौकरी करने वालों के लिए इवनिंग सेशन ट्रेडिंग को आसान बना सकता है। लेकिन क्या खुदरा निवेशकों के बीच इक्विटी f&o ट्रेडिंग को और प्रोत्साहित करना अच्छा है? आमतौर पर, लंबे समय तक ट्रेडिंग घंटे केवल उन बाजारों में आवश्यक होते हैं, जो एक ही एसेट जैसे कि बुलियन, कमोडिटीज और विदेशी मुद्रा में ट्रेड करते हैं। इक्विटी के लिए लंबे समय तक काम के घंटे अनावश्यक हैं। जबकि यह तर्क दिया जाता है कि शाम का सेशन ओपनिंग में बड़े अंतर को रोक सकता है। डेटा से पता चलता है कि भारतीय बाजार ज्यादातर पिछले दिन के क्लोजिंग लेवल के करीब खुलते हैं।

दूसरे देशों में कितने हैं मार्केट ट्रेडिंग घंटे

अगर हम अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों के ट्रेडिंग घंटों को देखें, तो इक्विटी ट्रेडिंग का समय आम तौर पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच होता है। कई शेयर बाजारों में लंच ब्रेक भी शामिल होता है, जब ट्रेडर्स आराम कर सकते हैं। लेकिन ज्यादातर कमोडिटी, बुलियन और फॉरेक्स प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ट्रेड करते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि एक ही एसेट को अलग-अलग विंडो में, दुनिया भर में लगभग 24 घंटे ट्रेड किया जा रहा होता है। उदाहरण के लिए, सोना या इसके डेरिवेटिव को एशिया, यूरोप या यूएस शेयर बाजारों में एक ही रूप में खरीदा जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कब ट्रेड करना चाहते हैं। इसी तरह, करेंसी पेयर्स को दुनिया भर में किसी भी मार्केट में ट्रेड किया जा सकता है, लेकिन करेंसी पेयर समान रहती है।

एक अपवाद भी


लेकिन शेयर बाजारों में, मुख्य रूप से घरेलू शेयरों और शेयर इंडेक्सेज का कारोबार प्रत्येक देश में होता है। इसलिए अन्य देशों के बाजारों के साथ ओवरलैपिंग ट्रेड टाइमिंग ज्यादा मदद नहीं कर सकती है। इसमें अपवाद अत्यधिक लोकप्रिय सूचकांक जैसे कि डाउ जोन्स या एसएंडपी 500 है, जो दुनिया भर में ट्रेड किए जाते हैं। इसलिए उनके डेरिवेटिव का कुछ एक्सचेंजों पर 24 घंटे ट्रेड होता है।


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