YEIDA ने बैंक ऑफ बड़ौदा से मिलाया हाथ
YEIDA ने इस परियोजना के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ हाथ मिलाया है। बतौर बैंकिंग पार्टनर वह एप्लिकेशन और बैंकिंग कार्यों को संभालने के लिए परियोजना में एक बैंकिंग भागीदार के रूप में भाग लेंगे। औद्योगिक भूखंडों की नीलामी हो या ड्रॉ प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारण, इन सभी में मानवीय हस्तक्षेप की न्यूनतम गुंजाइश न के बराबर रखी गई है।
यीडा जैसी पॉलिसी बनाने की मांग
यमुना अथॉरिटी ने अपने एरिया में बिल्डर प्रॉजेक्टों में फंसे बायर्स को उनके फ्लैट का मालिकाना हक दिलाने के लिए कुछ समय पहले डायरेक्ट रजिस्ट्री की पॉलिसी शुरू की थी। इसके तहत बायर्स बिल्डर के पास न जाकर सीधे अथॉरिटी के पास पहुंच सकते हैं और अपने फ्लैट के हिस्से का लीज रेंट जमा करके रजिस्ट्री करा सकते हैं। इस पॉलिसी का अभी तक 700 से ज्यादा बायर्स ने लाभ उठा लिया है। जानकारों का कहना है कि यदि ऐसी पॉलिसी नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी भी अपने यहां लागू कर दे तो इससे अथॉरिटी को भी राजस्व और बायर्स को अपने घर का मालिकाना हक मिल जाएगा। इसके बाद वह अपने घर को बेच भी सकता है।
डायरेक्ट रजिस्ट्री की पॉलिसी
यमुना अथॉरिटी ने बायर्स की इसी दिक्कत को देखते हुए डायरेक्ट रजिस्ट्री की पॉलिसी शुरू की थी। इसके तहत बायर सीधे अथॉरिटी के पास जाकर अपने फ्लैट के हिस्से का लीज रेंट अथॉरिटी में जमा करके रजिस्ट्री करा सकता है। यह लीज रेंट व किसानों का 64 फीसदी मुआवजे का पैसा लगभग उतना ही बैठ जाता है जितना कि स्टांप शुल्क का खर्चा फ्लैट का साइज के हिसाब से बैठता है। हालांकि, बायर्स के लिए इस तरह से रजिस्ट्री होना थोड़ा खर्चीला तो है लेकिन राहत यह है कि फ्लैट का मालिकाना हक मिल जाता है और कोई जरूरतमंद अपने फ्लैट को बेचना चाहता है तो आसानी से बेच सकता है। यमुना अथॉरिटी में अब तक 700 बायर्स ने इस पॉलिसी का लाभ उठाते हुए अपने फ्लैटों की रजिस्ट्री करा ली है। अब नोएडा-ग्रेनो में भी ऐसी पॉलिसी की मांग की जा रही है।
