साढ़े तीन साल से नहीं बदला PPF का ब्याज, चुनावी मौसम में मिलेगा फायदा? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
Updated on
29-09-2023 01:45 PM
नई दिल्ली: पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना और दूसरे लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों की हर तिमाही समीक्षा होती है। इसी कड़ी में इस महीने के अंत में यानी 30 सितंबर को सरकार इन योजनाओं की ब्याज दर की समीक्षा करेगी। सवाल यह है कि क्या दिसंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में इजाफा होगा? पिछली कुछ तिमाहियों में सरकार ने सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) की ब्याज दरों में इजाफा किया है। लेकिन पीपीएफ की दरों में एक अप्रैल 2020 से कोई बदलाव नहीं किया गया है। क्या इस बार यह ट्रेंड बदलेगा? जानिए एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं।
इसके लिए सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि ब्याज दरों को कैसे कैल्कुलेट किया जाता है। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें सेकेंडरी मार्केट में सरकार के 10 साल के बॉन्ड्स की मार्केट यील्ड से जुड़ी हैं। इसके लिए एक तय फॉर्मूला है। यह सरकारी बॉन्ड्स पर पिछले तीन महीने के एवरेज यील्ड के हिसाब से तय किया जाता है। इसी आधार पर सरकार हर तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर तय करती है। यह फॉर्मूला श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिशों पर आधारित है। सरकार ने 2016 में इसे नोटिफाई किया था। इसके मुताबिक पीपीएफ की ब्याज दर बेंचमार्क यील्ड से 25 बेसिस अंक अधिक होनी चाहिए।
चुनावी मौसम में मिलेगा फायदा?
जून से अगस्त 2023 के दौरान बेचमार्क बॉन्ड पर यील्ड का औसत 7.14 परसेंट रहा। इस तरह पीपीएफ की ब्याज दर 7.39 परसेंट होनी चाहिए। लेकिन सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। अप्रैल 2020 से यह 7.1 परसेंट पर ठहरा हुआ है। इसी तरह सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज दर बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड से 75 बेसिस अंक अधिक होनी चाहिए। फॉर्मूले के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए यह 7.89 परसेंट बैठती है। जुलाई-सितंबर तिमाही में इसकी ब्याज दर आठ परसेंट है। इसी तरह सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम पर बॉन्ड यील्ड से 100 बेसिस अंक ज्यादा मिलना चाहिए। फॉर्मूले के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए यह 8.14 परसेंट होना चाहिए। जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए इस पर 8.2 परसेंट ब्याज मिल रहा है।
ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म विंट वेल्थ के को-फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर अंशुल गुप्ता ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में यील्ड 6.9 से 7.3 परसेंट की रेंज में रही। जुलाई-सितंबर में यह 7.0 से 7.2 परसेंट है। चूंकि बेंचमार्क यील्ड में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। लेकिन चुनावी मौसम में सरकार इसमें इजाफा कर सकती है। इस साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और फिर अगले साल आम चुनाव होंगे।
कितनी हो सकती है बढ़ोतरी
सेबी में रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और StableInvestor.com के फाउंडर देव आशीष कहते हैं कि सरकार ने अप्रैल 2020 से पीपीएफ की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। तब इसे 7.9 परसेंट से घटाकर 7.1 परसेंट किया गया था। इस बार भी इसमें कोई बदलाव की संभावना नहीं है। कई जानकार मानते हैं कि अगर सरकार इसमें बढ़ोतरी भी करती है तो यह बेहद मामूली होगी। इसकी वजह यह है कि पीपीएफ फंड का साइज बहुत बड़ा है। अगर सरकार इसमें ज्यादा बढ़ोतरी करती है तो उस पर इंटरेस्ट का बोझ बढ़ जाएगा। GoalTeller के कोफाउंडर विवेक बांका कहते हैं कि महंगाई और अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए सरकार इस बार पीपीएफ की ब्याज दर में बदलाव कर सकती है। लंबे समय से निवेशकों को इसका इंतजार है और इसमें कम से कम 25 से 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है।
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