Select Date:

आज कजाकिस्तान में मिलेंगे पुतिन, जिनपिंग और शहबाज शरीफ:क्या है SCO समिट जिसमें नहीं पहुंच सके मोदी

Updated on 03-07-2024 02:06 PM

मध्य एशिया के देश कजाकिस्तान में आज शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन यानी SCO समिट की शुरुआत होगी। इसमें रूस, पाकिस्तान, चीन और तुर्किये के लीडर शामिल होंगे। रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास जंग के बीच ये पहला मौका होगा जब पुतिन, शी जिनपिंग, शहबाज शरीफ और एर्दोगन एक साथ, एक मंच पर होंगे।

हालांकि तुर्किये इस संगठन का सदस्य नहीं लेकिन एर्दोगन बतौर गेस्ट इस समिट में भाग लेंगे। भारत इस संगठन का सदस्य है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस समिट में शामिल नहीं हो रहे। इस समिट के जरिए 2 साल बाद मोदी और पुतिन की मुलाकात हो सकती थी। अब ऐसा नहीं होगा, भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर वहां मौजूद होंगे।

संसद सत्र या चीन-पाकिस्तान, मोदी ने क्यों रद्द किया कजाकिस्तान का दौरा?
सूत्रों के मुताबिक मोदी पहले इस समिट के लिए कजाकिस्तान जाने वाले थे। इसके चलते उनकी एडवांस सिक्योरिटी टीम ने अस्ताना जाकर वहां सुरक्षा का जायजा भी लिया था। बाद में संसद के सत्र की वजह से उन्हें दौरा रद्द करना पड़ा।

हालांकि, प्रधानमंत्री के नहीं पहुंचने से संगठन के प्रति भारत की गंभीरता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहबाज शरीफ और शी जिनपिंग की मौजूदगी के चलते मोदी के दौरे को रद्द किया गया है। फिलहाल चीन-पाकिस्तान दोनों ही देशों से भारत के संबंध ठीक नहीं हैं। मोदी के कजाकिस्तान जाने पर वे जिनपिंग और शहबाज शरीफ के आमने-सामने होते।

हालांकि, इस संगठन की बैठक में मौजूदगी दर्ज कराना भारत की मजबूरी है। ऐसा क्यों है, SCO संगठन क्या है, कितना ताकतवर है, ये भारत के लिए कितना अहम है ...विदेश मामलों के एक्सपर्ट राजन कुमार से जानिए ऐसे ही 5 सवालों के जवाब...

सवाल 1: SCO कब बना और इसे बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

जवाब: 1991 में सोवियत यूनियन कई हिस्सों में टूट गया। इसके बाद रूस के पड़ोसी देशों के बीच बाउंड्री तय नहीं होने की वजह से सीमा विवाद शुरू हो गया। ये विवाद जंग का रूप न ले, इसके लिए रूस को एक संगठन बनाने की जरूरत महसूस हुई।

रूस को यह भी डर था कि चीन अपनी सीमा से लगे सोवियत यूनियन के सदस्य रहे छोटे-छोटे देशों की जमीनों पर कब्जा न कर ले। ऐसे में रूस ने 1996 में चीन और पूर्व सोवियत देशों के साथ मिलकर एक संगठन बनाया। इसका ऐलान चीन के शंघाई शहर में हुआ, इसलिए संगठन का नाम- शंघाई फाइव रखा गया। शुरुआत में इस संगठन के 5 सदस्य देशों में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान शामिल थे।

जब इन देशों के बीच सीमा विवाद सुलझ गए तो इसे एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का रूप दिया गया। 2001 में इन पांच देशों के साथ एक और देश उज्बेकिस्तान ने जुड़ने का ऐलान किया, जिसके बाद इसे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन यानी SCO नाम दिया गया।

रूस को लगता था कि उसके आसपास के देशों में कट्टरपंथी सोच न बढ़े। अफगानिस्तान, सऊदी अरब और ईरान के करीब होने की वजह से ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में आतंकी संगठन पनपने भी लगे थे, जैसे- IMU यानी इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान में HUT। ऐसे में SCO के जरिए रूस और चीन ने इन तीन तरह के शैतानों के खिलाफ लड़ाई जारी रखी।

इसके अलावा सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और संबंधों को मजबूत करना भी इस संगठन का मुख्य काम है। सदस्य देशों के बीच ये संगठन राजनीति, व्यापार, इकोनॉमी, साइंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का काम कर रहा है।

सवाल 3: चीन-पाकिस्तान पर लगाम, सेंट्रल एशिया पर नजर, भारत के लिए क्यों जरूरी है SCO?

जवाब: SCO बनने के बाद भारत को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया था। हालांकि, उस समय भारत ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था।

इस बीच चीन ने पाकिस्तान को इस संगठन का सदस्य बनाने की मुहिम शुरू कर दी। इससे रूस को संगठन में चीन के बढ़ते दबदबे का डर लगने लगा। तब जाकर रूस ने भारत को भी इस संगठन में शामिल होने की सलाह दी।

इसके बाद 2017 में भारत इस संगठन का स्थायी सदस्य बना। भारत के इस संगठन में शामिल होने की 5 और वजहें भी हैं…

भारत का ट्रेड SCO के सदस्य देशों के साथ बढ़ता जा रहा था, ऐसे में इस संगठन से संबंध बेहतर करने के लिए।

सेंट्रल एशिया में दुनिया के कच्चे तेल और गैस का करीब 45% भंडार मौजूद है, जिसका उपयोग ही नहीं हुआ है। इसलिए भी ये देश भारत की एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए आने वालों सालों में अहम हैं।

सेंट्रल एशिया में अगर भारत को पहुंच बढ़ानी है तो SCO अहम है। इसकी वजह ये है कि इस संगठन में सेंट्रल एशिया के सारे देश एक साथ बैठते हैं।

अफगानिस्तान पर अपना पक्ष रखने के लिए भारत के पास कोई दूसरा संगठन नहीं है। अगर भारत को अफगानिस्तान में अपनी भूमिका तय करनी है तो उसे इन सभी देशों के सहयोग की जरूरत है।

आतंकवाद और ड्रग्स की समस्या को खत्म करने के लिए भारत को SCO के देशों के सहयोग की जरूरत है।\

सेंट्रल एशिया के देशों को भी इस संगठन में भारत की जरूरत थी। वो छोटे-छोटे देश नहीं चाहते थे जिससे केवल चीन और रूस ही संगठन में दबदबा बनाए रखें। इसके लिए वो भारत को बैलेंसिंग पावर के तौर पर चाह रहे थे।

सवाल 4: क्या अमेरिका के NATO को टक्कर देने के लिए रूस ने बनाया था SCO?

जवाब : नहीं, ऐसा कहना बिल्कुल गलत है। शुरुआत में ऐसा बिल्कुल नहीं था। अफगानिस्तान के मामले में अमेरिका को रूस का पूरा साथ था। 2001 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को गिराया था तो बुश को सबसे पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ही फोन किया था।

उस समय तक रूस और अमेरिका के संबंध अच्छे चल रहे थे। अमेरिका और रूस के संबंध 2004 से खराब होने शुरू हुए। जब US ने NATO को बढ़ाना शुरू कर दिया। इसके बदले में 2008 में रूस ने जॉर्जिया पर हमला कर दिया। तब दोनों देशों के बीच स्थिति काफी खराब हो गई थी।

इसी समय SCO संगठन में पहली बार नाटो के खिलाफ सेंटिमेंट पैदा हुआ। नतीजा ये हुआ कि उज्बेकिस्तान ने पहली बार अपने यहां बने अमेरिकी सैनिकों के बेस को हटवा दिया।

इसी के बाद SCO देशों में आतंकवाद के खिलाफ जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज होनी शुरू हुई। हालांकि इसके बावजूद SCO की तुलना NATO के साथ नहीं की जा सकती है।

वजह ये है कि NATO एक मिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन है जबकि SCO एक रीजनल और सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन है। इसका उद्धेश्य सदस्य देशों के बीच संबंध को बेहतर करना है।

SCO के सभी सदस्य पहले भी बोल चुके हैं कि इसका NATO से कोई वास्ता नहीं है। अगर रूस इसे NATO बनाना भी चाहेगा तो भारत ऐसा नहीं होने देगा। भारत की नीति है कि वो कभी किसी मिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन का हिस्सा नहीं बनेगा।

अगर SCO मिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन होता तो यूक्रेन जंग में चीन और इसके सदस्य देश खुलकर रूस का साथ देते।

सवाल 5: क्या SCO से भारत को कुछ खास हासिल हुआ है?

जवाब: दो मौकों पर SCO की वजह से भारत ने चीन को झुकने के लिए मजबूर किया है…

1. भारतीय अधिकारियों ने सितंबर 2022 में समरकंद में होने वाले SCO सम्मेलन के पहले चीन को साफ कर दिया था कि प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में तभी हिस्सा लेंगे, जब वह LAC पर तैनात अपनी सेनाओं को पहले की स्थिति में वापस बुला लेगा।

इस मैसेज का असर भी हुआ और SCO बैठक से ठीक एक हफ्ते पहले 8 सितंबर को चीन ने अपनी सेना को LAC में पूर्वी लद्दाख के हॉट-स्प्रिंग्स-गोर्गा इलाके, जिसे पेट्रोलिंग पॉइंट 15 भी कहा जाता है, से हटाना शुरू कर दिया।

दरअसल, 2022 में चीन की अगुवाई में होने वाले BRICS सम्मेलन में PM मोदी ने हिस्सा नहीं लिया था। जबकि कुछ दिनों बाद वह अमेरिकी अगुआई वाले QUAD देशों की बैठक में हिस्सा लेने टोक्यो चले गए थे। लिहाजा चीन नहीं चाहता था कि SCO सम्मेलन में मोदी की गैर मौजूदगी से इस संगठन के आपसी मनमुटाव का संदेश दुनिया में जाए। BRICS ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका का एक संगठन है।

2. 2017 में भी भारत ने चीन को कह दिया था कि अगर डोकलाम में चीनी सेनाएं अपनी पहले की स्थिति में नहीं लौटेंगी तो प्रधानमंत्री मोदी BRICS समझौते के लिए चीन के शियामेन नहीं जाएंगे। चीन ने भारत की बात मानी और मोदी ने BRICS समझौते के लिए शियामेन की फ्लाइट पकड़ ली।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 05 August 2026
नई दिल्ली/रियाद: यमन के पास लाल सागर में भारतीय झंडे वाले एक व्यापारिक जहाज को मिसाइल या रॉकेट जैसे किसी प्रोजेक्टाइल से हमला कर डूबो दिया गया। इस जहाज का…
 05 August 2026
कीव: यूक्रेन ने रूस पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। यह आरोप यूक्रेनी शहर खेरसॉन में एक ड्रोन से सब्जी बेचने वाले का पीछा करने और उसे घायल करने…
 05 August 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर पर पुरानी बातों को दोहराया है। पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को बयान जारी करते हुए कहा है कि वह कश्मीर के लोगों के…
 05 August 2026
वॉशिंगटन: भारत सरकार के फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में बदलाव के प्रस्ताव की अमेरिकी कांग्रेसमैन राइली मूर ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ये सीधे-सीधे ईसाईयों को निशाना…
 05 August 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे प्रदर्शनों ने दुनिया का ध्यान खींचा है। पीओके में लग रहे आजादी के नारों से बौखलाए पाकिस्तानी नेता कश्मीरियों को अहसानफरामोश…
 01 August 2026
ढाका: बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान ने कहा कि एक देश के साथ रिश्ते बेहतर होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश के साथ रिश्ते खराब…
 01 August 2026
मॉस्को/नई दिल्ली: भारत बिजली की रफ्तार से 'फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल' (FRCV) और 'फ्यूचर मेन बैटल टैंक' (FMBT) प्रोग्राम के तहत अपने खुद के बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों का तेजी से…
 01 August 2026
मैड्रिड: स्पेन ने कहा है कि उत्तरी अफ्रीका के स्पेनिश इलाके सेउटा में अचानक आए प्रवासी संकट पर बहुत हद तक काबू कर लिया गया है। स्पेनिश अधिकारियों का कहना…
 01 August 2026
मास्‍को/नई दिल्‍ली/कीव: भारत और रूस के बीच दोस्‍ती सोवियत जमाने से ही दुनिया में एक मिसाल है। साल 1971 का बांग्‍लादेश युद्ध हो या भारत का परमाणु विस्‍फोट, रूस भारत…
Advt.