दो चरणों में मणि महोत्सव का आयोजन
कार्यक्रम संयोजक श्रीनिवास शास्त्री ने बताया कि मणि महोत्सव का दो चरणों में आयोजन किया गया है। प्रवचन सत्र में आचार्य रत्नेश ने कहा कि धार्मिक पुस्तक रुद्रमाल में अयोध्या के मणि पर्वत तीर्थ का वर्णन मिलता है। इसमें कहा गया है कि माता जानकी को दहेज के रूप में विशाल मात्रा में माणिक आभूषण प्राप्त हुए थे। उन्हें जिस स्थल पर रखा गया वहां माणियों का एक पहाड़ निर्मित हो गया जिससे मणि पर्वत की स्थापना हुई। मणि पर्वत पर मेले का आयोजन सदियों से होता आया है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरितालिका तीज पूरे देश में बड़े ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाता है।
