अटल बिहारी वाजपेयी को आधुनिक लखनऊ का जनक कहा जाता है। उन्होंने यहां से सांसद बनने के बाद प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया। देश के सबसे प्रदेश की राजधानी में तब ट्रैफिक की समस्याओं से जूझना पड़ रहा था। इसको देखते हुए फैजाबाद रोड से रायबरेली रोड होते हुए कानपुर रोड को जोड़ने वाली 23 किलोमीटर लंबी शहीद पथ की योजना तैयार की गई। इस योजना को महज तीन दिनों में हरी झंडी दी गई। प्रधानमंत्री बनने के साथ ही अटल जी ने लखनऊ को पहली सौगात शहीद पथ की दी थी। 1999 के अंत में अटल तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर विशेष रूप से लखनऊ आए। स्वागत कार्यक्रम में शहीद पथ की घोषणा कराई। आज शहीद पथ लखनऊ की लाइफलाइन बन गया है। इस सड़क के दोनों तरफ बहुमंजिली इमारतों का जाल बिछ गया है। यहां पर थीम सिटी भी बसाई गई है। इसमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से लेकर आईटी सिटी, मेडीसिटी, कैंसर इंस्टीट्यूट, आईआईआईटी बन चुके हैं। विभूतिखंड का इलाका भी इसी शहीद पथ की वजह से विकसित कॉमर्शियल सेंटर बन सका।
अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा पार्कों के सौंदर्यीकरण पर जोर देते थे। वे कॉलोनियों में पार्क की महत्ता पर जोर देना शुरू किया। उनकी पहल पर कॉलोनियों की करीब 200 पार्कों का सौंदर्यीकरण किया गया। दीनदयाल पार्क, कैसरबाग बारादरी, बुद्धा पार्क, नींबू पार्क, स्वर्णजयंती पार्क, झंडेवाला पार्क शामिल रहे।
अटल के सांसदी काल में करीब 900 एकड़ जमीन पर गोमतीनगर विस्तार को लॉन्च किया गया। इसके अलावा झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले करीब 1800 परिवारों को उनकी पहल पर शिफ्ट करने की योजना बनी। इसके लिए जानकीपुर विस्तार को लॉन्च किया गया। अटल के दिशा-निर्देशन में ही 5, 10 और 15 रुपए दैनिक किश्तों पर आवास देने का मॉडल बना। यह स्लम के विकास का अपना मॉडल था।
अटल जी ने हमेशा ट्रैफिक सुधार पर जोर दिया। वे ईजी मोबिलिटी की वकालत करते थे। अटल ने लखनऊ में सात नए फ्लाईओवर्स का निर्माण कराया। इसमें विवेक खंड गोमतीनगर, इंजीनियरिंग चौराहा, सदर क्रॉसिंग, आरडीएसओ, मवैया जैसी जगहों पर फ्लाईओवर बनवाए गए। करीब 42 चौराहों का नए सिरे से उन्होंने विकास कराया। इससे ट्रैफिक समस्या को दुरुस्त करने में काफी हद तक कामयाबी मिली है।