'12वीं फेल' के मनोज से कम नहीं है श्रीकांत बोला का संघर्ष, कभी पढ़ाई के लिए किया केस, आज 400 करोड़ की है कंपनी
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12-04-2024 01:52 PM
राजकुमार राव इस वक्त चर्चा में हैं अपनी फिल्म 'श्रीकांत' का ट्रेलर पिछले दिनों रिलीज हुआ और इस फिल्म की कुछ ही झलकियों ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है। एक दिव्यांग बिजनेसमैन श्रीकांत बोला की जिंदगी पर बेस्ड ये कहानी तमाम मुश्किलों से जीत की कहानी है। आंखों से न देख पाना श्रीकांत के सपनों को कभी तोड़ नहीं पाया, ऊंचे ख्वाब देखे और अपने उन ख्वाबों को पूरा भी किया। श्रीकांत बोला के किरदार को राजकुमार राव ने बड़े पर्दे पर बड़ी ही खूबसूरती से फिल्माने की कोशिश की है। ये फिल्म केवल एक कहानी नहीं बल्कि वो जज्बा भी है जो हर किसी के लिए एक ऐसी प्रेरणा है कि अगर आपने कुछ करने की ठान ली है तो आप इसे कर सकते हैं, बस आपमें वो हौंसला होना जरूरी है।
फिल्मी दुनिया में स्पोर्ट्स , राजनीति और आजादी की लड़ाई के वीरों पर ढेरों कहानियां बनी हैं। इस बार तुषार हीरानंदानी देश के एक ऐसे हीरे की कहानी लेकर आए हैं जो देखने वालों की आंखें खोल देंगी। इस ट्रेलर में दिखाया गया है कि नेत्रहीन होने के बावजूद श्रीकांत कैसे पढ़ाई-लिखाई में अव्वल रहे और खुद को पहला विजुअली चैलेंज्ड राष्ट्रपति के तौर पर देखा करते थे। हालांकि, उनके इस उड़ान के पर काटने की कोशिशें भी खूब हुईं और सबसे पहली मुश्किल उनके सामने इंडियन एजुकेशन सिस्टम ने खड़ी की थी।
12वीं में श्रीकांत ने 98 प्रतिशत अंक किया था हासिल
श्रीकांत की रियल लाइफ की बात करें तो उनका जन्म साल 1991 में आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में हुआ था। नहीं देख पाने की वजह से बचपन से ही उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं, उनके माता-पिता को ये तक सलाह दी गई कि वो अपने बेटे को छोड़ दें क्योंकि वो देख नहीं पाते। नहीं देख पाने की वजह से साथ वाले बच्चे बचपन से ही उनका मजाक बनाया करते थे लेकिन श्रीकांत ने जैसे सबकुछ पहले से ही ठान रखी थी। 12वीं में श्रीकांत ने 98 प्रतिशत अंक हासिल कर ये साबित कर दिया कि वो देश के उन होनहार बच्चों में हैं जिसपर हमें गर्व होना चाहिए।
MIT ने उन्हें स्कॉलरशिप देकर बुलाया
इसके बाद श्रीकांत की असली परीक्षा शुरू हुई। उन्हें साइंस में पढ़ाई करनी थी लेकिन उनके सामने मुसीबत बनी इंडियन एजुकेशन सिस्टम जिसमें विजुअली चैलेंज्ड बच्चों को इस सब्जेक्ट से पढ़ाई की अनुमति ही नहीं थी। आखिरकार उन्होंने इंडियन एजुकेशन सिस्टम पर केस करने का फैसला लिया और आखिरकार कानून ने भी उनकी बातें सुनी और समझी। 6 महीने तक चली लड़ाई के बाद उन्हें साइंस से आगे की पढ़ाई की इजाजत मिली। जहां श्रीकांट को 12वीं के बाद देश के कॉलेजों ने अपने यहां दाखिला देने से साफ-साफ इनकार कर दिया था वहीं दुनिया के टॉप 4 कॉलेज MIT ने उन्हें स्कॉलरशिप देकर बुलाया। हालांकि, यहां भी उन्हें धक्का लगा जब पढ़ाई के लिए जाते समय उन्हें नेत्रहीन होने की वजह से अकेले फ्लाइट में ट्रैवल नहीं करने दिया गया। श्रीकांत उस समय लोगों से भीख मांगते रहे कि कोई ये कह दे कि वो उनके साथ ट्रैवल कर रहे हैं लेकिन कोई भी उनकी मदद करने के लिए तैयार नहीं हुआ।
अमेरिका ने इन्हें पढ़ाई और काम करने भी मौका दिया
फाइनली तमाम चुनौतियों के बावजूद श्रीकांत Massachusetts Institute of Technology से ग्रैजुएशन करने वाले पहले इंटरनैशनल विजुअली चैलेंज्ड स्टूडेंट (अंतरराष्ट्रीय दृष्टिहीन स्टूडेंट) बन गए। इसके बाद अमेरिका ने इन्हें काम करने भी मौका दिया लेकिन बोला शुरू से ही कुछ अलग करने का सपना देख रहे थे।
रतन टाटा से लेकर राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम तक हुए मुरीद
बता दें कि बोला ने साल 2011 में Samanvai Center for Children with Multiple Disabilities (समन्वय सेंटर) की शुरुआत की और उन बच्चों को पढ़ाई करने की सुविधा दी जो गई जो मल्टीपल डिसएबिलिटीज से जूझ रहे थे। साल 2012 में श्रीकांत ने बोलैंट इंडस्ट्रीज की शुरुआत की। ये कंपनी नैचुरल पत्तों और रीसाइकल पेपर से इको फ्रेंडली डिस्पोज़िबल प्रोडक्ट्स बनाती है और खास बात ये है कि विकलांग लोगों को रोजगार भी देती है। उनके इस इनोवेटिव आइडिया ने लोगों का ध्यान खींचा और कई बड़े बिजनेसमैन ने फंडिंग भी की। रतन टाटा से लेकर राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम तक ने मदद का हाथ बढ़ाया। रिपोट्स के मुताबिक इस कंपनी की वैल्यू 400 करोड़ के पास पहुंच गई है।
रतन टाटा से लेकर राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम तक हुए मुरीद
बता दें कि बोला ने साल 2011 में Samanvai Center for Children with Multiple Disabilities (समन्वय सेंटर) की शुरुआत की और उन बच्चों को पढ़ाई करने की सुविधा दी जो गई जो मल्टीपल डिसएबिलिटीज से जूझ रहे थे। साल 2012 में श्रीकांत ने बोलैंट इंडस्ट्रीज की शुरुआत की। ये कंपनी नैचुरल पत्तों और रीसाइकल पेपर से इको फ्रेंडली डिस्पोज़िबल प्रोडक्ट्स बनाती है और खास बात ये है कि विकलांग लोगों को रोजगार भी देती है। उनके इस इनोवेटिव आइडिया ने लोगों का ध्यान खींचा और कई बड़े बिजनेसमैन ने फंडिंग भी की। रतन टाटा से लेकर राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम तक ने मदद का हाथ बढ़ाया। रिपोट्स के मुताबिक इस कंपनी की वैल्यू 400 करोड़ के पास पहुंच गई है।
फोर्ब्स मैगजीन के 30 under 30 एशिया में आया नाम
साल 2016 में बोला Surge Impact Foundation के डायरेक्टर बने और देखते ही देखते साल 2018 में कंपनी का टर्नओवर करीब 180 करोड़ रुपये तक गया । साल 2017 में श्रीकांत का नाम फोर्ब्स मैगजीन के 30 under 30 एशिया में आया जो बहुत बड़ी उपलब्धि थी। पर्सनल लाइफ की बात करें तो श्रीकांत ने वीरा स्वाति से शादी रचाई है और एक बच्ची के पिता हैं। बताते चलें कि ये फिल्म 10 मई को रिलीज हो रही है।
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