देश का सबसे बड़ा IPO लाएगा टाटा ग्रुप! RBI के एक नियम ने बढ़ा दी रतन टाटा की चिंता
Updated on
16-09-2023 04:50 PM
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) की शेयर मार्केट में लिस्टिंग हो सकती है। आरबीआई (RBI) ने टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी (NBFC) के रूप में क्लासिफाई किया है। इस लिस्ट में शामिल कंपनियों के लिए व्यापक रेगुलेटरी कंपलायंसेज की जरूरत होती है। इसके लिए टाटा संस को सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना होगा। अगर कंपनी लिस्ट होगी तो इससे उससे निवेशकों को काफी फायदा होगा। टाटा संस की अनुमानित वैल्यू करीब 11 लाख करोड़ रुपये है। इस तरह कंपनी में पांच परसेंट हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 55,000 करोड़ रुपये होगी। यानी अगर कंपनी आईपीओ लाने का फैसला करती है तो यह देश का सबसे बड़ा इश्यू होगा। अब तक यह रेकॉर्ड एलआईसी (LIC) के पास है जो पिछले साल 21,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई थी। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की 66% और शापूरजी पलौंजी ग्रुप की इसमें 18.4% हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की दूसरी कंपनियों और दूसरे शेयरहोल्डर्स के पास है।
आरबीआई ने गुरुवार को अपर कैटगरी में शामिल 15 एनबीएफसी की लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस भी शामिल है। आरबीआई के एनबीएफसी टैग से बचने के लिए कंपनी दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकती है। इस बारे में टाटा संस ने टिप्पणी करने से इन्कार किया। साथ ही टाटा ट्स्ट्स के प्रमुख और टाटा संस के चेयरमैन एमिरेटस रतन टाटा ने भी ईमेल का जवाब नहीं दिया। आरबीआई के मुताबिक अपर लेयर लिस्ट में शामिल एनबीएफसी को सख्त नियमों का पालन करना होगा। इनमें नोटिफाई होने की तीन साल के भीतर लिस्टिंग भी शामिल है। आरबीआई ने पिछले साल सितंबर में पहली बार यह लिस्ट जारी की थी। उसके बाद टाटा संस ने आरबीआई से छूट पाने की संभावनाओं को टटोला था। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन हैं।
क्या हैं विकल्प
एक एनालिस्ट ने कहा कि अगर टाटा संस के शेयरों को आईपीओ के जरिए लिक्विड करेंसी में बदला जाएगा लेकिन वैल्यूएशन के फ्रंट पर पेच फंसेगा। इसकी वजह यह है कि अमूमन इन्वेस्टर्स होल्डिंग कंपनीज में डिस्काउंट अप्लाई करते हैं। हालांकि टाटा संस के पास आरबीआई के नोटिफिकेशन की शर्तों को पूरा करने के लिए टाइम है लेकिन सूत्रों का कहना है कि आरबीआई के नियमों से बचने के लिए कंपनी दूसरे विकल्पों को टटोल सकती है। इसमें कंपनी का पुनर्गठन भी शामिल है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक अपर लेयर एनबीएफसी को नोटिफिकेशन की तारीख के तीन महीने के भीतर अपने रेगुलेशंस के बारे में बोर्ड से अप्रूव एक रोड मैप तैयार करना होगा। यह साफ नहीं है कि टाटा संस के बोर्ड ने एक तरह को कोई प्लान बनाया है या नहीं।
टाटा संस के अलावा उसकी इनडायरेक्ट सब्सिडियरी टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज भी आरबीआई की लिस्ट में शामिल है। टाटा संस इस कंपनी को टाटा कैपिटल में मर्ज कर रही है। टाटा संस ने फाइनेंशियल ईयर 2023 की रिपोर्ट में कहा है कि कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को आसान बनाने से एक बड़ी कंपनी बनेगी जिसके पास स्ट्रॉन्ग कैपिटल और एसेट बेस होगा। इससे आरबीआई के नियमों के मुताबिक लिस्टिंग के लिए तैयार स्ट्रक्चर बनाने में मदद मिलेगी।
टाटा ने क्या कहा था
दिसंबर, 2004 में टाटा संस के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा ने मॉरीशस में द संडे टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वह ग्रुप की होल्डिंग कंपनी को लिस्ट कराना चाहेंगे। तब उन्होंने कहा था कि यह बर्कशायर हैथवे (वॉरेन बफे की कंपनी) की तरह होगी।' साल 2017 में टाटा संस के तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने कोर्ट में एक हलफनामे में कहा था कि उनके परिवार ने 2014 में टाटा संस को लंदन में लिस्ट करने की टाटा ट्रस्ट्स की योजना का विरोध किया था। मिस्त्री परिवार टाटा संस में सबसे बड़ा सिंगल इंडिविजुअल शेयरहोल्डर है। टाटा संस में मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी की कीमत करीब दो लाख करोड़ रुपये है।
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