बिहार में शिक्षकों को अब स्कूल के पास मिलेगा आवास, नीतीश सरकार ने बनाया बड़ा प्लान
Updated on
30-10-2023 01:38 PM
पटना: बिहार की नीतीश सरकार ने राज्य के करीब 5 लाख सरकारी शिक्षकों को उनके स्कूल के पास आवास उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसका मकसद शिक्षकों का ध्यान पढ़ाई पर ज्यादा केंद्रित करना है। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कई शिक्षकों को जिला मुख्यालय में किराए पर घर लेना पड़ता है। यात्रा में समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। इसलिए विभाग ने बड़ी संख्या में स्कूलों के पास स्थित मकान, इमारतों को उनके आवास के लिए किराए/पट्टे पर लेने का फैसला किया है।
बिहार सरकार ने क्यों बनाया ये प्लान?
शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) सुबोध कुमार चौधरी ने बताया, 'शिक्षकों को उनकी पोस्टिंग वाले स्कूलों के नजदीक आवास उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे समय पर स्कूलों में पहुंच सकें और केवल बच्चों को पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकें। दरअसल जब टीचर का दूर से सफर करके स्कूल पहुंचता है उसका टाइम भी ज्यादा खराब होता है और खर्चा भी उन्हें ज्यादा उठाना पड़ता है। सरकार ने शिक्षकों की सुविधा और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए ये फैसला किया है।' बता दें, पहली बार राज्य सरकार की ओर से ऐसा कदम उठाया गया।
शिक्षकों की सैलरी पर कितना खर्च करती है बिहार सरकार?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग शिक्षकों को वेतन भुगतान पर लगभग 33,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, जो विभाग के वार्षिक बजट का लगभग 80% (लगभग 40,450 करोड़ रुपये) आता है। इनमें से, सरकार शिक्षकों को 8% की दर से आवास किराया भत्ता (एचआरए) के रूप में लगभग 2,500 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है। एक अधिकारी ने कहा, अब शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में शिक्षण मानकों में सुधार के लिए शिक्षकों के आवास की व्यवस्था करने के लिए एचआरए पैसे का उपयोग करना चाहता है।
शिक्षकों के आवास के लिए दो मॉडल पर काम कर रहा विभाग
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग अपने विचार को क्रियान्वित करने के लिए दो मॉडलों पर काम कर रहा है। इच्छुक पार्टियों से औपचारिक सुझाव मांगने के लिए पहले ही स्थानीय न्यूज पेपर में विज्ञापन दिया जा चुका है। अधिकारी ने कहा कि 'सबसे पहले, शिक्षा विभाग ने मकान मालिकों, बहुमंजिला इमारतों के मालिकों से रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित की है, जिसमें उनसे यह बताने के लिए कहा गया है कि वे किसी विशेष स्थान पर कितनी इमारतें किराए या पट्टे पर प्रदान कर सकते हैं। दूसरा, विभाग ने रियल एस्टेट कंपनियों/फर्मों/व्यक्तियों से भी प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं, जो केवल शिक्षकों के आवास के लिए जिला/उपमंडल/ब्लॉक मुख्यालयों पर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कर सकते हैं।'
रविवार को प्रकाशित एक विज्ञापन के अनुसार, ऐसी इमारतों का निर्माण कंपनियों को स्वयं करना होगा और विभाग उन्हें मासिक किराए पर दीर्घकालिक पट्टे पर लेगा। संबंधित पक्षों को इस साल 4 नवंबर तक अपने आवेदन भेजने के निर्देश के साथ यह विवरण देने के लिए कहा गया है कि वे कितने फ्लैट/इमारतें तुरंत उपलब्ध करा सकते हैं और अगले एक/दो वर्षों में कितनी इमारतों का निर्माण कर सकते हैं।
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