इसरो के लिए लॉन्चपैड बनाने वाले को 18 महीनों से सैलरी नहीं! कर्जा हुआ तो पत्नी के जेवर गिरवी, अब बेच रहा इडली
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21-09-2023 01:11 PM
नई दिल्ली : हाल ही में देश ने इतिहास रचा है। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरकर भारत को ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना दिया है। लेकिन चंद्रयान-3 से पहले इसरो के लॉन्चपैड निर्माण में शामिल रहे एक टेक्नीशियन अब कथित तौर पर चाय और इडली बेच रहे हैं। इन टेक्नीशियन का नाम दीपक कुमार उपरारिया (Deepak Kumar Uprariya) है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपरारिया हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड, रांची में काम करते हैं। उन्हें आर्थिक तंगी के चलते चाय और इडली बेचने पर मजबूर होना पड़ा है। HEC एक CPSU कंपनी है, जिसने इसरो के लिए कई महत्वपूर्ण काम किये थे। ऐसा कहा जा रहा है कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों को 18 महीने से सैलरी (Salary) नहीं दी है।
गिरवी रखने पड़े पत्नी के जेवर
रिपोर्ट के अनुसार उपरारिया ने पहले तो क्रेडिट कार्ड के जरिए अपने घर खर्च को मैनेज करने की कोशिश की। भारी कर्ज में डूबने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों से पैसे लेना शुरू किया। इसके बाद उन्हें घर चलाने के लिए अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रखने पड़े। बीबीसी ने उपरारिया के हवाले से कहा, 'पहले मैंने अपने खर्चे क्रेडिट कार्ड से मैनेज करने शुरू किये। इस पर मुझे 2 लाख का कर्ज हो गया और मुझे डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया। इसके बाद, मैंने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर अपना घर चलाना शुरू किया। अब मुझ पर 4 लाख रुपये से अधिक का कर्ज है।'
कभी 50 तो कभी 100 रुपये की कमाई
उन्होंने आगे कहा, 'जब मुझे लगा कि मैं भूख से मर जाऊंगा, तो मैंने एक इडली की दुकान खोल ली। मेरी पत्नी अच्छी इडली बनाती है। अब में हर दिन 300-400 रुपये की इडली बेच रहा हूं। जिससे मुझे कभी 50 तो कभी 100 रुपये की कमाई होती है।'
8000 रुपये की सैलरी पर किया था जॉइन
दीपक उपरारिया मध्यप्रदेश में हरदा जिले के रहने वाले हैं। दीपक ने साल 2012 में एक प्राइवेट कंपनी की 25,000 रुपये की नौकरी छोड़कर HEC में 8,000 रुपये की सैलरी पर जॉइन किया था। सरकारी कंपनी में अच्छा भविष्य की बात सोचकर उन्होंने एचईसी जॉइन की थी। वे कहते हैं, 'मेरी दो बेटियां हैं। वे स्कूल जाती हैं। मैं इस साल में अभी तक भी उनकी फीस नहीं दे पाया हूं। स्कूल की तरफ से हर दिन नोटिस आता है। क्लास में टीचर कहते हैं कि एचईसी वाले पैरेंट्स के बच्चे कौन हैं, खड़े हो जाएं।'
कोई मोमोज बेच रहा तो कोई चाय
बीबीसी के मुताबिक दीपक उपरारिया अकेले नहीं हैं, कई एचईसी कर्मचारी अपना घर चलाने के लिए छोटा-मोटा काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एचईसी के एक दूसरे कर्मचारी मधुर कुमार मोमोज बेच रहे हैं। प्रसन्ना भोई चाय बेच रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2800 एचईसी कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
आर्थिक संकट से जूझ रही है कंपनी
आईएएनएस के अनुसार, एचईसी पिछले दो-तीन वर्षों से आर्थिक संकट का सामना कर रही है। न्यूज एजेंसी के अनुसार, एचईसी ने 1,000 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल प्रदान करने के लिए हैवी इंडस्ट्रियल मिनिस्ट्री से कई बार अनुरोध किया है। हालांकि, मिनिस्ट्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केंद्र कोई मदद नहीं दे सकता। एजेंसी ने इस महीने की शुरुआत में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि पिछले ढाई साल से एचईसी में किसी स्थायी सीएमडी की नियुक्ति नहीं हुई है।
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