भारत के इस फैसले से चीन को लगेगा झटका, लैपटॉप, कंप्यूटर इंपोर्ट के नियम में फिर से बदलाव
Updated on
20-10-2023 03:34 PM
नई दिल्ली : सरकार ने लैपटॉप और कंप्यूटर के इंपोर्ट पर लाइसेंसिंग मानदंडों में बदलाव किया है। अब इन उत्पादों के आयातकों के लिए एक ऑनलाइन मंजूरी सिस्टम बनाया गया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) संतोष कुमार सारंगी ने गुरुवार को बताया कि नई लाइसेंसिंग या मंजूरी व्यवस्था का मकसद मुख्य रूप से इन उत्पादों के आयात की निगरानी करना है। यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे विश्वसनीय सोर्स से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
सारंगी ने कहा कि इंपोर्ट पर अंकुश को लेकर इनसे जुड़े लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए नीति में कुछ बदलाव किए गए हैं और आयातकों के लिए 'एंड-टू-एंड' ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया गया है। सारंगी ने कहा कि यह सिस्टम आयातकों के लिए बिना कहीं जाए और बिना संपर्क डिटेल भरने की सुविधा प्रदान करेगी। नई लाइसेंस व्यवस्था लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर (टैबलेट कंप्यूटर सहित), माइक्रो कंप्यूटर, बड़े या मेनफ्रेम कंप्यूटर और कुछ डेटा प्रोसेसिंग मशीनों पर लागू है।
क्यों अहम है सरकार का ये फैसला
यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार ने चार अगस्त को घोषणा की थी कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और चीन जैसे देशों से आयात में कटौती करने के उद्देश्य से आयातकों को एक नवंबर से इन वस्तुओं के आयात के लिए लाइसेंस की जरूरत होगी।
लाइसेंस के लिए क्या करना होगा
डीजीएफटी ने कहा कि आयातक आयात का लाइसेंस हासिल करने के लिए सिस्टम पर आवेदन कर सकता है। इसमें मात्रा, मूल्य या किसी देश पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। नई प्रणाली की तैयारी में रेवेन्यू डिपार्टमेंट भी शामिल है और पूरी आवेदन प्रक्रिया में लगभग 10 मिनट का समय लगेगा। लाइसेंस ऑटोमैटिक तरीके से जारी किया जाएगा।
इन्हें नहीं मिलेगा लाइसेंस
सारंगी ने कहा, 'डिनाइड आइडेंटिटी लिस्ट' में शामिल कंपनियों को लाइसेंस नहीं मिलेगा। ऐसी सूची में वे कंपनियां शामिल हैं जिन्होंने एक्सपोर्ट प्रोमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) जैसी योजनाओं का लाभ उठाकर निर्यात दायित्वों को पूरा नहीं किया है या चूक की है। या जिनके खिलाफ डीआरआई (डायरोक्टेरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) के मामले चल रहे हैं। पुराना सामान या आयात करने की इच्छुक कंपनियों को भी इस लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी।
विश्वसनीय डिजिटल प्रणाली हो
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह सब हमें उस तरह का डेटा और जानकारी प्रदान करे जिसकी हमें आवश्यकता है जिससे हमारे पास एक पूरी तरह से विश्वसनीय डिजिटल प्रणाली हो।'
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