तेल की दुनिया में उथलपुथल के बीच 3% चढ़ गया यह शेयर, जानिए क्यों आई तेजी
Updated on
28-09-2023 01:49 PM
नई दिल्ली: दुनिया में तेल की स्थिति का भारत की तेल इंडस्ट्री पर भी असर दिखाई दे रहा है। तेल की कीमत में उतारचढ़ाव, सप्लाई की समस्या और जियोपॉलिटिकल कारणों से भारत का तेल सेक्टर भी प्रभावित हो रहा है। तेल की कीमतों से लेकर स्टॉक्स तक में इसका असर दिख रहा है। बीएसई ऑयल एंड गैस सेक्टर में 0.10 परसेंट की मामूली तेजी दिख रही है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ऑयल इंडिया लिमिटेड (Oil India Limited) ने निवेशकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। कंपनी के शेयरों में 3.72% की तेजी देखने को मिली। यह स्टॉक बीएसई पर 305 रुपये पर पहुंच गया जो इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर है। कीमत में बढ़ोतरी के साथ इसके वॉल्यूम में 2.99 गुना से अधिक तेजी आई।
ऑयल इंडिया लिमिटेड कच्चे तेल और नेचुरल गैस के एक्सप्लोरेशन, डेवलपमेंट और प्रॉडक्शन से जुड़ी है। साथ ही यह कच्चे तेल के ट्रांसपोर्टेशन और एलपीजी के प्रॉडक्शन से भी जुड़ी है। कंपनी का मार्केट कैप 32,163.46 करोड़ रुपये है। एशियाई बाजार में शुरुआती ट्रेडिंग में तेल की कीमत में तेजी आई है और यह 2023 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब ग्लोबल सप्लाई टाइट होने के बीच अमेरिका में क्रूड के भंडार में भारी गिरावट आई है। इस कारण गुरुवार सुबह कच्चे तेल की वायदा कीमत में तेजी आई। दिसंबर ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स 0.61% की तेजी के साथ 94.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि नवंबर के लिए WTI 0.99 फीसदी तेजी के साथ 94.61 डॉलर पर पहुंच गया।
भारतीय मार्केट में अक्टूबर डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमत Multi Commodity Exchange (MCX) पर 1.08% की तेजी के साथ 7,876 रुपये पर खुली जो पिछले सत्र में 7,792 रुपये पर बंद हुई थी। नवंबर फ्यूचर्स भी 0.77 परसेंट की तेजी के साथ 7,691 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। पिछले सत्र में यह 7,632 रुपये पर बंद हुआ था। कुशिंग में भंडार में कमी के कारण यह तेजी आई है। मजबूत रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट डिमांड के कारण यह ट्रेंड दिख रहा है जो हब में मौजूद बाकी तेल की क्वालिटी पर चिंता पैदा करते हैं और इसके मिनिमम ऑपरेटिंग लेवल से नीचे जाने का खतरा है।
प्रॉडक्शन में कटौती के कारण इंवेंट्री में गिरावट आई है। सऊदी अरब और रूस ने इस साल के अंत तक उत्पादन में रोजाना 13 लाख बैरल की कटौती का ऐलान किया है। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने एक्सपोर्ट में तेजी के कारण आई तेजी के बाद रिटेल प्राइस को स्थिर करने के लिए कदम उठाए हैं। इसमें एक प्रस्ताव घरेलू इस्तेमाल के लिए रखे गए ऑयल प्रॉडक्ट्स के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगाना भी है। इससे मार्केट की स्थिति और टाइट हो सकती है।
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