जिन पर भरोसा था, मुश्किल समय में उन्होंने ही साथ छोड़ा, क्या चीन की तरफ था पीएम मोदी का इशारा?
Updated on
23-05-2023 07:45 PM
पोर्ट मोरेस्बी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक पुरानी कहावत का जिक्र करते हुए 14 प्रशांत द्वीपीय देशों के नेताओं से कहा कि सच्चा मित्र वही होता है, जो कठिन घड़ी में काम आए। जिन्हें विश्वासपात्र समझा जाता था वे ‘‘जरूरत के समय हमारे साथ खड़े नहीं रहे।’’ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने चीन का परोक्ष जिक्र करते हुए यह बात कही। मोदी ने यहां एक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत चुनौतीपूर्ण समय में प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ खड़ा रहा। उन्होंने प्रशांत द्वीपीय देशों से कहा कि वे भारत को अपने विकास के एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देख सकते हैं क्योंकि वह उनकी प्राथमिकताओं का सम्मान करता है और सहयोग करने का उसका दृष्टिकोण मानवीय मूल्यों पर आधारित है।
क्या चीन की तरफ था इशारा प्रधानमंत्री मोदी ने पापुआ न्यू गिनी के अपने समकक्ष जेम्स मारापे के साथ इस शिखर सम्मेलन की सह अध्यक्षता की। भारत का 14 प्रशांत द्वीप देशों (पीआईसी) के साथ जुड़ाव उसकी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों की मानें तो पीएम मोदी ने चीन का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा शायद उसकी ही तरफ था। साल 2020 में जब दुनिया कोविड-19 से जूझ रही थी तो चीन, पूर्वी लद्दाख में टकराव को बढ़ाने में लगा था। मगर हर कोई जानना चाहता है कि आखिर वह कौन से विश्वासपात्र हैं जिनका नाम लिए बिना पीएम मोदी ने उन पर हमला बोला।
चीन का आक्रामक रवैया पापुआ न्यू गिनी की राजधानी में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में ये टिप्पणियां की हैं, जब चीन क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपना रहा है और प्रशांत द्वीपीय देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है। मोदी पापुआ न्यू गिनी की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। मोदी ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के प्रतिकूल प्रभाव और अन्य वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जिन्हें हम अपना विश्वासपात्र समझते थे, ऐसा पाया गया कि वे जरूरत के समय हमारे साथ खड़े नहीं रहे। इस मुश्किल दौर में पुरानी कहावत सही साबित हुई: सच्चा दोस्त वही है, जो कठिन घड़ी में काम आए।’’
हर तरीके से आपके साथ प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की यात्रा के अपने दूसरे चरण में रविवार को यहां पहुंचे। उन्होंने प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद प्रशांत की महत्ता को भी रेखांकित किया और कहा कि भारत सभी देशों की संप्रभुता एवं अखंडता का सम्मान करता है। मोदी ने हिंद-प्रशांत द्वीपीय सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) को संबोधित करते हुए प्रशांत द्वीपीय देशों को भरोसा दिलाया कि भारत ‘‘बिना किसी हिचकिचाहट’’ के उनके साथ अपने अनुभव एवं क्षमताएं साझा करने के लिए तैयार है और ‘‘हम हर तरीके से आपके साथ हैं।’’
भारत एक विश्वसनीय साथी उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि भारत इस मुश्किल समय में भी अपने प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। भले ही भारत में निर्मित टीकों या आवश्यक दवाइयों की बात हो या गेहूं या चीनी की बात हो, भारत ने अपनी क्षमताओं के अनुसार अपने साथी देशों की मदद करना जारी रखा।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के लिए साझेदारी को लेकर भारत का दृष्टिकोण ‘‘मानवीय मूल्यों’’ पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत आपकी प्राथमिकताओं का सम्मान करता है। आपके विकास में साझेदार बनना हमारे लिए गर्व की बात है-- भले वह मानवीय सहायता हो या आपका विकास हो, आप भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के तौर पर देख सकते हैं।’’
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