गाजियाबाद में निमोनिया से दो माह की बच्ची की मौत, हालत खराब हुई तो लेकर आए थे एमएमजी अस्पताल
Updated on
05-12-2023 01:56 PM
अक्षय अग्रवाल, गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में छोटी बच्ची की निमोनिया से मौत मामला सामने आया है। मिस्टीरियस निमोनिया की आशंकाओं के बीच जिले में दो महीने की एक बच्ची की निमोनिया से मौत हो गई। परिजन उसका उपचार निजी डॉक्टर से करवा रहे थे, लेकिन बच्ची को आराम नहीं मिल रहा था। हालत बिगड़ने पर परिजन बच्ची को एमएमजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कराने की बात कह रहा है। विजयनगर में कांशीराम योजना के तहत बने भवन में रहने वाले मुकेश की पत्नी ने करीब दो महीने पहले जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। पिछले कुछ दिनों से एक बच्ची की तबीयत खराब चल रही थी। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। मुकेश ने बच्ची को मिर्जापुर गांव में एक डॉक्टर को दिखाया।
डॉक्टर ने बच्ची को निमोनिया बताते हुए उपचार शुरू कर दिया, लेकिन बच्ची को आराम नहीं मिल रहा था। सोमवार सुबह बच्ची की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो मुकेश उसे एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एमएमजी अस्पताल की ओर से सर्विलांस विंग को इसकी सूचना भेज दी गई है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
तेजी से बढ़े निमोनिया के मरीज
मौसम में ठंडक बढ़ने और प्रदूषण के चलते लोगों को फेफड़ों के संक्रमण की शिकायत हो रही है। वहीं, बच्चों में यह संक्रमण निमोनिया का रूप भी ले रहा है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में ही रोजाना 500 से ज्यादा बच्चे पहुंच रहे हैं। ज्यादातर बच्चों को बुखार, खांसी, जुकाम, कंपकपी और सांस लेने में परेशानी हो रही है। एमएमजी के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन उपाध्याय ने बताया कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस कारण सर्दी बढ़ने के साथ बच्चों में निमोनिया और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस समय ओपीडी में बच्चों की संख्या 20 फीसदी बढ़ गई है।
तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क
बाल रोग विशेषज्ञ और एसीएमओ डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि यदि बच्चे में कंपकंपी के साथ बुखार, उल्टी-दस्त, सांस लेने में दिक्कत, खांसी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। निमोनिया रोग बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। इसमें एक या दोनों फेफड़ों के वायु के थैलों में द्रव भरने से सूजन पैदा हो जाती है। इस कारण से बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है।
डॉक्टर ने कहा कि बच्चों को सर्दी में निमोनिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है जो जानलेवा भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि जुड़वा बच्चों में अधिकांश एक बच्चे की इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए बच्चे के बीमार होने पर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
अस्पतालों में पहुंचे 3 हजार मरीज
जिला एमएमजी अस्पताल में सोमवार को 1828 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। इनमें 835 महिला, 649 पुरुष और 344 बच्चे शामिल थे। ज्यादातर बच्चे खांसी और सांस में तकलीफ की शिकायत के थे। इसी तरह कंबाइंड अस्पताल में 957 मरीजों का पंजीकरण हुआ। इनमें 253 बच्चे शामिल थे। दोनों अस्पतालों में 10 से 20 गंभीर बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।
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