ग्रीन बॉन्ड जारी कर अर्बन लोकल बॉडीज जुटा रहीं मोटा पैसा, 12 शहरों ने नगरपालिका बॉन्ड से 4,384 करोड़ जमा किये
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07-10-2023 03:03 PM
नई दिल्ली : केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने शहरी स्थानीय निकायों (अर्बन लोकल बॉडी) को सलाह दी है कि सेवाओं को आसानी से लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर जोर देना होगा। वित्तीय संसाधनों के लिए ग्रीन बॉन्ड जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। 12 शहरों ने नगरपालिका बॉन्ड के माध्यम से 4,384 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है। अहमदाबाद, भुवनेश्वर, मैसूर, राजकोट, नागपुर और पुणे ने शहरी विकास को लेकर कई अहम प्रयोग किए हैं। छह शहरी स्थानीय निकायों ने अपनी एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण मंच (आईजीओटी) कर्मयोगी यात्रा शुरू की है, जिसमें कुल 3,852 अधिकारियों का नामांकन हुआ है। सामूहिक रूप से 4,561 से अधिक कोर्स पूरे किए हैं। ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिए अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि लोगों को सरकारी सेवाओं का फायदा आसानी से पहुंचे।
ग्रीन बॉन्ड से जुटाया इन कार्यों के लिए पैसा
G20 की बैठकों के दौरान में भी शहरी विकास के लिए ग्रीन बॉन्ड जारी कर सौर ऊर्जा जैसे प्रोजेक्ट के लिए पैसा इकट्ठा करना, क्लीन ट्रांसपोर्टेशन, वेस्ट टु एनर्जी प्रोजेक्ट को बढ़ावा देना, प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के जरिए फाइनैंस को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था। ग्रीन कवर का दायरा बढ़ाने, वेस्ट टु एनर्जी प्रोजेक्ट, साफ पानी जैसे मुद्दों पर काम करने के लिए शहरों को एक-दूसरे के साथ रणनीति साझा करनी होगी। हाल ही में हुए एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश भर में सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए क्षमता निर्माण के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण विकसित करना है। जो शहर अपने यहां नए प्रयोग कर रहे हैं, उनके बारे में दूसरे शहर भी देखें और अगर संभव हो तो उसको लागू करने के बारे में भी विचार किया जाए।
इंदौर बना पहला शहर
देश मे इंदौर पहला ऐसा शहर है, जहां पर ग्रीन बॉन्ड का पब्लिक इश्यू जारी किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाइमेट फाइनैंस के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के साथ- साथ खुद के संसाधनों के विकास पर भी ध्यान देना होगा। शहर में ज्यादा से ज्यादा सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और बिजली पर आने वाले खर्च को कम करने के लिए यह प्लान लागू किया गया था।
18 लाख करोड़ का निवेश
केंद्रीय आवास मंत्रालय के मुताबिक देश के शहरों और कस्बों के परिवर्तन में वर्ष 2014 से 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। 13वें वित्त आयोग ने वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-2015 की अवधि के बीच शहरी स्थानीय निकायों को 23,111 करोड़ रुपये प्रदान किए गए थे। जबकि 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-2026 के बीच यह राशि छह गुना बढ़कर 1,55,628 करोड़ रुपये हो गई।
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