युद्ध के बाद बदली स्थिति
भारत-चीन युद्ध के बाद भोटिया जनजाति के लिए चीजें बदल गईं। तिब्बत से व्यापार खत्म हुआ तो लोगों ने खेती शुरू की। हालांकि, बाद में सेना की बढ़ती चौकसी और घाटियों में निगरानी से भी बदलाव आया। किसानों की करीब 60 फीसदी जमीन सेना ने अपने पास रखी। इसके बदले उन्हें मुआवजा दिया जान लगा। हालांकि, नीती और माणा घाटी में भोटिया जनजाति के करीब 20 हजार लोग निवास करते हैं। ग्रामीण अपनी बची जमीन पर राजमा और आलू की खेती करते हैं। ठंड अधिक होने के कारण यहां पर धान और गेहूं की फसल नहीं उपजती है। स्थानीय ग्रामीण ऊन के कपड़े बनाने का भी काम करते हैं। महिलाएं भी इस काम को करती हैं। इसे मेले और चारधाम यात्रा में बेचा जाता है। इसी समुदाय की बनी ड्रेस पीएम मोदी ने पिथौरागढ़ के पार्वती कुंड मंदिर दौरे के दौरान भी पहनी है।
