पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर भारत-चीन में कैसी होड़? दिन-रात मेहनत कर रहे दोनों देशों के सैनिक, जानें मामला
Updated on
03-07-2023 07:13 PM
बीजिंग: गलवान में भारतीय और चीनी सेनाओं में हिंसक झड़प के तीन साल बाद भी पैंगोंग त्सो के आसपास तनाव बना हुआ है। इस इलाके में दोनों देशों की सेनाओं ने अपने-अपने टैंकों को आमने-सामने तैनात कर रखा है। चीन पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ने के लिए एक पुल बनाने की जल्दी में है। वहीं, भारत भी उत्तरी तट पर अपनी तरफ एक ब्लैक-टॉप सड़क का निर्माण कर रहा है। लद्दाख में गतिरोध शुरू होने के बाद से ही दोनों देश सीमा से सटे इलाकों में तेजी से बुनियादी ढांचे का विकास कर रहे हैं। इसने पूर्वी लद्दाख मे जमीन पर यथास्थिति को स्थायी रूप से बदल दिया है। इस बीच भारत और चीन सीमा विवाद का समाधान खोजने के लिए कोर कमांडर स्तर की 19वें दौर की वार्ता का इंतजार कर रहे हैं।
भारत ने सड़कें और लैंडिंग ग्राउंड बनाए
द हिंदू की रिपोर्ट में एक आधिकारिक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि हमारी तरफ फिंगर 4 की ओर ब्लैक-टॉप रोड का निर्माण जारी है और 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। बुनियादी ढांचे, रोड नेटवर्क, अपग्रेडेड लैंडिंग ग्राउंड जैसे डेवलपमेंट पर ज्यादा फोकस है। एक दूसरे अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है। सूत्र ने बताया कि इसके अलावा, सासेर ला से होकर जा ने वाली महत्वपूर्ण दारबुक-स्काईओक-दौलत बेग ओल्डी सड़क के वैकल्पिक मार्ग का भी निर्माण कार्य एडवांस स्टेज में है।
चीन भी तेजी से कर रहा निर्माण
पैंगोंग त्सो के आसपास चीन भी तेजी से बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। एक सूत्र ने बताया है कि पैंगोंग पर मुख्य पुल पर काम चल रहा है, जबकि दूसरे पुल का काम पूरा हो चुका है। हाल में ही उत्तरी तट पर निर्माण सामग्री के साथ बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां देखी गई हैं। एक अन्य आधिकारिक सूत्र ने खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि चीन पुल के अलावा शेडोंग गांव की ओर दक्षिणी तट पर सड़क मार्ग पर भी तेजी से काम कर रहा है। इसके अलावा खुरनाक फोर्ट के पूर्व मेमं चीन ने एक एयर डिफेंस साइट भी बनाई है। इसके अलावा, यूली में G-0177 एक्सप्रेसवे के साथ 22 किमी लंबी सुरंग निर्माणाधीन है, जो तिब्बत में बहुत महत्वपूर्ण G-216 राजमार्ग से जुड़ रही है।
पैंगोंग त्सो में गतिरोध अब भी बरकरार
135 किमी लंबी बूमरैंग आकार की पैंगोंग झील का एक तिहाई हिस्सा भारत के पास है, जबकि बाकी का चीन के पास। चांग चेन्मो पर्वत श्रृंखला के हिमनद झील तो छूने वाले पर्वतीय क्षेत्रों को फिंगर्स कहा जाता है। भारत ने हमेशा झील को फिंगर 4 तक अपने कब्जे में रखा है, लेकिन उसका दावा फिंगर 8 तक चलता है, जहां से भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा गुजरती है। भारत ने कई मौकों पर फिंगर 8 तक अपना दावा पेश किया है। वहीं, उत्तरी तट पर दक्षिणी तट की तुलना में एलएसी की धारणा में बहुत अधिक अंतर है। यहीं से मई 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पों की शुरुआत हुई थी। जुलाई और अगस्त 2020 में दोनों देशों के बीच कैलाश रेंज को लेकर तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया था। भारतीय सेना ने फिंगर 3 के पास एक स्थायी कैंप बनाया है, जबकि चीनियों के पास फिंगर 8 के पूर्व में एक बेस है।
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