हरदीप पुरी ने क्यों 2008 में आई मंदी की बात छेड़ी, इसके पीछे है पेट्रोल-डीजल
Updated on
05-10-2023 03:17 PM
नई दिल्ली: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को बड़ी बात कह दी। उन्होंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इससे साल 2008 की विनाशकारी मंदी की स्थिति दोहराई जा सकती है। उस साल कच्चे तेल या क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू गईं थीं। बाजार में इसके खरीदार नहीं रहे और इसकी मांग घट गई थी। उनका कहना था इसी तरह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रही तो फिर से वैसी हालत हो सकती है।
ब्याज दर में बढ़ोतरी से नहीं बनेगी बात
पुरी ने ब्लूमबर्ग टीवी पर कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति की मात्रा के साथ जहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी अतिरिक्त तरलता को खत्म करने में सक्षम नहीं है, आपके सामने ऐसी स्थिति होगी, जब तेल की कीमतें 2008 के परिदृश्य को दोहराएंगी।" उन्होंने आश्चर्य जताया कि क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था फिर से 2008 की आर्थिक उथल-पुथल जैसी स्थिति का गवाह बनने जा रही है, जो एक स्व-पूर्ति की भविष्यवाणी बन गई थी। ब्रेंट की कीमतें शुरुआत में जनवरी 2008 में 93.60 डॉलर प्रति बीबीएल से बढ़कर जुलाई 2008 में 134.3 डॉलर प्रति बीबीएल हो गई थीं, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी में तेजी आई, जिससे अंततः मांग कम हो गई, तब तेल की कीमतें बहुत कम हो गईं।
लोग फंस रहे हैं गरीबी के दुष्चक्र में
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पिछले 18 महीनों के दौरान दुनियाभर में लगभग 10 करोड़ लोग घोर गरीबी के दुष्चक्र में फंस गए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल के सप्ताहों के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके पीछे क्योंकि सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने कीमतें बढ़ाने के लिए सप्लाई में कटौती का फैसला है।
भारत के लिए क्या है सुविधाजनक मूल्य
हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि भारत जैसे देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतें लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल या उससे थोड़ा कम रहे तो बढ़िया है। ऐसे देशों के लिए यही सुविधाजनक मूल्य सीमा होगी। उन्होंने कहा, "उचित मूल्य बैंड के गठन पर स्वस्थ चर्चा करना तेल उत्पादक और उपभोक्ता सहित सभी देशों के हित में है।"
ओपेक के महासचिव से भी की है मुलाकात
पुरी ने बीते मंगलवार को ही वार्षिक अबू धाबी अंतर्राष्ट्रीय पेट्रोलियम प्रदर्शनी और सम्मेलन (ADIPEC) 2023 के मौके पर ओपेक महासचिव हैथम अल-घैस से मुलाकात की है। इस दौरान उनसे ऑयल मार्केट में व्यावहारिकता, संतुलन और सामर्थ्य की भावना पैदा करने के लिए अपने कार्यालय का उपयोग करने का आग्रह किया। चर्चा के दौरान, भारत के मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अगस्त 2022 के बाद से ओपेक प्लस देशों द्वारा किए गए उत्पादन में कटौती के कारण, प्रभावी रूप से कुल वैश्विक तेल उपलब्धता का लगभग 5 प्रतिशत बाजार से हटा दिया गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमत में पिछले 3 महीनों में 34 प्रतिशत वृद्धि हुई है। ऊर्जा की बढ़ती मांग के बावजूद ये कटौती की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें बीते जून में 72 डॉलर प्रति बैरल (BBL) से बढ़कर सितंबर 2023 में 97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। इससे क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करने वाले अधिकांश देशों की क्षमताओं पर गंभीर दबाव पड़ा है।
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