तालिबान बनाम फरीद मामूमदजय, फंसा भारत
भारत अफगानिस्तान पर वही नीति अपना रहा है जो ज्यादातर अन्य देश कर रहे हैं। भारत ने अभी तक तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं दी है। भारत अभी भी फरीद मामूमदजय को ही अफगानिस्तान का राजदूत मानता है। इन सबके बीच भारत अब तालिबान के साथ बेहतर रिश्ते बना रहा है। भारत ने दूतावास को फिर से खोलने के साथ-साथ अफगानिस्तान को कई टन गेहूं भेजा है। तालिबान अपने राजदूत को नियुक्त करना चाहता है लेकिन इसके लिए भारत को वीजा देना होता।
इसका तोड़ निकालते हुए तालिबान ने पहले से भारत में मौजूद अफगान अधिकारी कादिर को नियुक्त करने की चाल अब चली है। तालिबानी अक्सर भारत में अपने दूतावास को निर्देश देते रहते हैं लेकिन उनके निर्देशों का यहां पर पालन नहीं होता है। हाल ही में अफगानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में तालिबान को मान्यता नहीं दिया गया। इसके बाद भी तालिबानी रूस,चीन, पाकिस्तान, ईरान, कतर समेत 14 देशों में अपने राजदूत नियुक्त कर चुके हैं। नई दिल्ली में अफगान दूतावास में मचे घमासान से भारत सरकार बुरा फंस गई है। एक तरफ राजदूत फरीद मामूमदजय हैं जिनके भारत के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और दूसरी ओर तालिबानी हैं जो भारत के साथ रिश्ते बेहतर कर रहे हैं। भारत को मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए अभी तालिबान की सख्त जरूरत है।
