मुश्किलें और चुनौतियां आई। दोस्तों-रिश्तेदारों के ताने सुनने को मिल रहे थे, लेकिन कहते हैं न कि संघर्ष के बाद सफलता मिलती है। अनीता अपने 50 लोगों के परिवार में पहली महिला थी,जो कमाई कर रही थी। सिर्फ 20 साल की उम्र में ही वो कमाने लगी और फाइनेंशियल तौर पर अपने पैरों पर खड़ी हो गई। अनीता वहीं नहीं रूकी, वो बढ़ती रही। उन्होंने देखा कि फैशन और क्लोथिंग ब्रांड में महिलाएं न के बराबर हैं। उन्हें ये बात बहुक खल रही थी, फिर क्या था, उन्होंने इस कमी को दूर करने की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया। 300 sq फीट की जगह से उन्होंने अपने ब्रांड की शुरुआत की। उन्होंने भारतीय परंपरा के साथ वेस्टर्न फैशन का फ्यूजन किया। वेस्टर्न फैशन के साथ इंडियन क्राफ्टिंग की। कपड़े तैयार हो चुके थे और अब बेचने की बाकी थी, लेकिन ये सब आसान नहीं था। शॉपिंग मॉल से लेकर फैशन शॉप ने उनके डिजाइन को रिजेक्ट कर दिया।