टेबलेट, मोबाइल की भीड़ में कहीं गुम हो गए तुम, आपको तो याद है न नीले ढक्कन वाला रेनॉल्ड्स 045 पेन
Updated on
26-08-2023 02:13 PM
नई दिल्ली: ट्यूशन हो, स्कूल हो या फिर किसी को बर्थडे पर गिफ्ट देना हो...सफेद रंग पर नीले ढक्कन वाला पेन याद है न आपको। क्लास हो या फिर किसी को गिफ्ट देना हो तो सफेद रंग पर नीली कैप वाला महज 5 रुपए का ये पेन बेहद खास होता था। अमेरिकी रेनॉल्ड्स इंटरनेशनल कंपनी का बनाया यह पेन भारत के एजुकेशन सिस्टम में ऐसा रचा-बसा की यहीं का होकर रह गया। भले ही आज टैबलेट, मोबाइल और लैपटॉप ने इसकी जरूरत को कम कर दिया हो, लेकिन 80, 90 के दशक के लोगों के लिए के लिए यह हर दिल अजीज था। वर्ड, डॉक्स और पीडीएफ की दुनिया में हम भले इससे दूर हो गए हो, लेकिन जब सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि रेनॉल्ड्स पेन हमेशा के लिए बंद होने जा रहा है, तो लोगों के दिल टूटने लगे, हालांकि कंपनी ने खबरों को खंडन करते हुए इसे गलत बताया। आज कहानी उसी नीले ढक्कन वाले पेन की...
अपने देश का नहीं, फिर भी बन गया अपना
अमेरिका के एक डिपार्टमेंट स्टोर में काम करने वाले मिल्टन रेनॉल्ड्स ने बिना किसी तकनीकी ज्ञान और बड़े निवेश के एक ऐसे पेन का अविष्कार किया, जिसने लोगों को स्याही, दवात से आजादी दी। उस दौर में केवल बायरो पेन का इस्तेमाल होता था। मिल्टन जानते कि इस पेन का दौर अब खत्म हो रहा है। साल 1945 में मिल्टन ने एक ऐसा पेन तैयार किया, जिसमें बार-बार लिंक भरने का झंझट नहीं था। जब इस पेन को उन्होंने लॉन्च किया तो ये भी दावा किया गया कि इससे पानी के भीतर भी लोग लिख सकेंगे। इसी दौर में दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ । अमेरिका जीतने वाले देशों में शामिल था। मिल्टन ने अपने बॉल पेन की कीमत 12 डॉलर रखी, जो उस उस दौर के हिसाब से काफी महंगा था।
12 डॉलर का एक पैन
मिल्टन के इस पैन की कीमत को लेकर लोगों को थोड़ी हैरानी भी हुई। उस दौर में 12 डॉलर की एक कलम लोगों में चर्चा का विषय बन गया। युद्ध खत्म हुआ था, लोग युद्ध से लौटे अपनों के लिए एक खास और कीमती तोहफा लेना चाहते थे। ऐसे में इस पेन ने पूरे मार्केट में हंगामा मचा दिया। रातों-रात इस पेन ने अमेरिका के बाजार में हंगामा मचा दिया। साल 1948 का दौर आया और यह पेन अमेरिका से निकलकर यूरोप के बाजार में पहुंचा। बॉल पेन , जिससे लिखना आसान था, तेजी के लिखाई हो जाती थी। लोगों को खूब पसंद आ रहा था।
1980 में भारत में एंट्री
साल 1980 में इसकी एंट्री भारत में हुई। 1980 से लेकर 2010 तक यह पेन हर स्टूडेंट का अजीज रहा । धीरे-धीरे भारत में यह पेन आइकन बन गया। भारत में इसे रेनॉल्ड पेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंननी बेच रही थी। मिल्टन के रिटायर होते ही शिकागो स्थित इसकी पेन ब्रांच बंद हो गई। साल 2007 तक भारत की रेनॉन्ट्स पेन इंडिया को छोड़कर सभी ब्रांच बंद हो गए। भारत में आज भी इस पेन का जलवा है। साल 2006 में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर इस पेन का विज्ञापन करते थे। भारत में आज इस का पूरा बिजनेस Flair पेन संभालता है।
दशकों तक 5 रुपये में बिकता रहा
भारत में यह पेन दशकों तक 5 रुपये में मिलता रहा। साल बदले, महंगाई बढ़ी, लेकिन इस पेन की कीमत जस की तस रही। हालांकि आज ये मार्केट में 7 रुपये का बिक रहा है, लेकिन बाजार में इसकी डिमांड में कमी आई है। नीली, काली और लाल टोपी वाला यह पेन पेन की लोकप्रियता भारतीयों में काफी है। रेनॉल्ड्स 045 नाम में 045 उसके जन्म का साल है। 1945 में इस पेन को बनाया गया था, इसलिए मिल्टर ने अपने नाम के साथ इसके जन्म साल को भी जोड़कर नाम तय किया।
नई दिल्ली: लोन पर स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर है। अगर उन्होंने लोन की किस्त नहीं चुकाई तो उनके डिवाइस पूरी तरह लॉक किए जा…
मुंबई: स्वदेश में ही इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रही कंपनी आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (RRP Electronics) की तरफ से बड़ी खबर आई है। कंपनी ने बताया है कि…
नई दिल्ली: कांवड़ यात्रा के दौरान गाजियाबाद और मेरठ के बीच सड़क यातायात प्रभावित होने का असर नमो भारत ट्रेन की यात्रियों की संख्या पर भी दिख रहा है। इस…
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से बैंकों और फाइनैंशल टेक्नॉलजी कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी…
नई दिल्ली: शेयर बाजार के नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) ने ट्रेडर्स की नींद उड़ा दी है। आखिरी वक्त में कीमतों में होने वाले अचानक और बड़े बदलावों से निवेशकों…
नई दिल्ली: लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को हरी झंडी दे दी है। इससे सरकार को UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने…