500 साल पहले पहुंची थी एक नाव: ग्रीनलैंड कैसे बना डेनमार्क का हिस्सा, ट्रंप ने जो बताया जानें उसकी पूरी कहानी
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10-01-2026 12:40 PM
नुक/कोपेनहेगेन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने जा रहे हैं। अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि चीन और रूस को दूर रखने के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा जरूरी है। ट्रंप ने तर्क दिया कि अगर अमेरिका नहीं करेगा कि जो चीन और रूस ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे। उन्होंने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता को नजरअंदाज कर दिया और कहा कि 'हम ग्रीनलैंड के बारे में कुछ करने जा रहे हैं, चाहे उन्हें यह पसंद हो या नहीं।' इस दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के अधिकार को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, मैं डेनमार्क का प्रशंसक हूं, लेकिन 500 साल पहले उनकी एक नाव वहां पहुंची थी, इसका मतलब यह नहीं कि इस जमीन पर उनका मालिकाना हक है। आखिर ट्रंप किस नाव की बात कर रहे थे और ग्रीनलैंड कैसे 3500 किमी दूर डेनमार्क का हिस्सा बना, आइए जानते हैं।
1000 साल पहले पहुंचे थे नॉर्स लोग
ग्रीनलैंड में इंसान के सबसे पहले कदम 4000-5000 साल पहले आज के कनाडा के रास्ते उत्तरी महाद्वीप से आए थे। ये लोग थुले में पतले जलडमरूमध्य में समुद्र के जमने के बाद उसी रास्ते से पहुंचे थे। इन्हें इनुइट कहा जाता है। ग्रीनलैंड में पहली नॉर्डिक (नार्वे और डेनमार्क मूल के लोग) मौजूदगी 10वीं शताब्दी के अंत में मिलती है, जब एरिक द रेड ने इस आइलैंड पर कदम रखा। एरिक एक नॉर्स वाइकिंग थे, जिन्हें आइसलैंड में एक हत्या के आरोप में देश से निकाल दिया गया था।
डेनिश पादरी नाव लेकर पहुंचे ग्रीनलैंड
एरिक के नेतृत्व में नॉर्स लोग लोग दक्षिणी ग्रीनलैंड में बस गए। नॉर्स आबादी सदियों तक ग्रीनलैंड में रहे लेकिन 1500 ईस्वी के आसपास उनकी आबादी लगभग गायब हो गई। इसके कारणों को अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं गया है। इसके लगभग 200 साल बाद 1721 में नॉर्वे के एक मिशनरी हैंस एगेडे एक नाव लेकर ग्रीनलैंड पहुंचे। एगेडे की यात्रा डेनमार्क और नार्वे की राजशाही के समर्थन से हुई थी। उस समय दोनों देश एक राजशाही के अधीन थे।
डेनमार्क की कॉलोनी बना रहा ग्रीनलैंड
एगेडे को ग्रीनलैंड में रहने वाले लोगों को फिर से ईसाई धर्म में हुए रिफॉर्मेशन से जोड़ने के लिए भेजा गया था, लेकिन जब वे वहां पहुंचे तो केवल इनुइट लोगों को पाया। उन्होंने अपने प्रयासों से उन्हें ईसाई धर्म में बदलने का फैसला किया। यह ग्रीनलैंड में औपनिवेशिक काल की शुरुआत थी। 1814 में डेनमार्क और नार्वे की राजशाही अलग हो गई तो डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को अपने पास रखा। 1916 में अमेरिका ने डेनमार्क की ग्रीनलैंड पर अधिकार की पुष्टि की। इसके बदले में अमेरिका को डेनिश वेस्टइंडी की खरीदने का मौका मिला था। ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों पर अभी भी नार्वे दावा कर रहा था लेकिन 1933 में उस समय के लीग ऑफ नेशंस के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसके खिलाफ फैसला सुनाया।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बना डेनमार्क का हिस्सा
दूसरे विश्वयुद्ध के बात ग्रीनलैंड में उपनिवेशवाद खत्म करने के डेनमार्क पर दबाव बढ़ने लगा। संयुक्त राष्ट्र की लगातार मांग के बाद 1953 में इस कॉलोनी को डेनमार्क में मिला दिया गया। ग्रीनलैंड को डेनमार्क की संसद में दो सीटें दी गईं। 1979 में ग्रीनलैंड को होमरूल दिया गया, जिसमें संसद का गठन शामिल था। इसमें आजादी पाने के लिए एक ब्लूप्रिंट शामिल था। 2009 में एक कानून पारित किया गया, जिसने पक्का कर दिया कि डेनमार्क से आजादी लेने का फैसला ग्रीनलैंड के लोग ही करेंगे।
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