भारत से रिश्ते सामान्य कर रहा चीन, अमेरिकी रिपोर्ट में जलन क्यों? अरुणाचल पर चेताया
Updated on
24-12-2025 02:23 PM
वॉशिंगटन: पेंटागन ने अमेरिकी संसद को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें अरूणाचल प्रदेश और भारत- चीन संबंध को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। इस रिपोर्ट में चीन के उत्थान और एशिया की जियो-पॉलिटिक्स में होने वाले अहम राजनीतिक बदलावों की बात की गई है। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि "चीन की दीर्घकालिक रणनीति का मूल लक्ष्य वर्ष 2049 तक "चीनी राष्ट्र का महान पुनरुत्थान" हासिल करना है।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि "इस लक्ष्य के तहत बीजिंग न सिर्फ अपनी वैश्विक प्रभाव क्षमता बढ़ाना चाहता है, बल्कि एक ऐसी विश्व स्तरीय सेना खड़ी करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है, जो युद्ध लड़ने और जीतने में सक्षम हो।"
पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें आगे कहा गया है कि "चीन की रणनीति में संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा, सर्वोच्च प्राथमिकता मानी जाती है और इसी सोच के तहत वह अपने आंतरिक और बाहरी सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है।" इसके अलावा पेंटागन की रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर भी बात की गई है। खासकर इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चीन, भारत के साथ सीमा विवाद को सामान्य कर रहा है।पेंटागन की रिपोर्ट में भारत-चीन संबंध पर क्या है? पेंटागन की अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने अपनी नेशनल स्ट्रैटजी में तीन तथाकथित "कोर इंटरेस्ट" तय किए हैं, जिन्हें वह किसी भी तरह की बातचीत या समझौते से परे मानता है। इनमें पहला, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का पूर्ण नियंत्रण, दूसरा, देश का आर्थिक विकास और तीसरा, चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय दावों की रक्षा और विस्तार शामिल है। बीजिंग ने इन कोर इंटरेस्ट्स के दायरे में ताइवान, दक्षिण चीन सागर, सेनकाकू द्वीप और भारत के अरुणाचल प्रदेश जैसे विवादित क्षेत्रों को भी शामिल कर लिया है। यानि, अरूणाचल प्रदेश को चीन अब अपना राष्ट्रीय हित मानता है। जिसका मतलब हुआ कि अरूणाचल को लेकर भारत और चीन के बीच आने वाले वक्त में, शायद कुछ सालों में विवाद तेज होने की संभावना है।
पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन शायद LAC पर कम तनाव का फायदा उठाकर, द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करना चाहता है और अमेरिका-भारत संबंधों को गहरा होने से रोकना चाहता है। हालांकि भारत शायद चीन की कार्रवाइयों और इरादों पर संदेह करता है। लगातार आपसी अविश्वास और अन्य परेशानियां निश्चित रूप से द्विपक्षीय संबंधों को सीमित करती है। यानि, पेंटागन का मानना है कि चीन, भारत के साथ संबंधों को सामान्य करना चाहता है, लेकिन भारत में चीन को लेकर अविश्वास है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं, जो भारत और चीन के बीच संबंध को सामान्य होने की संभावनाओं को कम करते हैं।
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