बांग्लादेश में तारिक रहमान ही भारत के पास एकमात्र विकल्प! क्या जमात को हरा पाएगी BNP? जानें चुनौतियां
Updated on
01-01-2026 12:59 PM
ढाका: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। बुधवार को उनके जनाजे में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी जिसके चलते ढाका में नए साल की पूर्व संध्या पर सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। खालिदा जिया को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत से विदेश मंत्री जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर पहुंचे, वह दिखाता है कि कई लोगों का ये मानना है कि इस साल 12 फरवरी को होने वाले चुनावों में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) विजेता बनकर उभर सकती है।
बांग्लादेश में अगली सरकार बनाने के लिए किसे समर्थन करे, इस बार में नई दिल्ली के पास सीमित विकल्प हैं। मुख्य विकल्प BNP, NCP और जमात-ए-इस्लामी हैं। जमात-ए-इस्लामी के भारत विरोधी रुख और कट्टर इस्लामी विचारों के कारण भारत के लिए जमात के साथ काम करना बहुत मुश्किल है। वहीं, एनसीपी ने भी जमात के साथ हाथ मिलाया है। ऐसे में बीएनपी सबसे अच्छा विकल्प बचता है।
तारिक रहमान के सामने चुनौती
तारिक रहमान पर भी नए बांग्लादेश का वादा पूरा करने का दबाव है, लेकिन उनके सामने दुविधा है। सत्ता में रहते हुए खालिदा जिया ने जमात के साथ गठबंधन किया था। इसके लिए उनकी आलोचना होती रही और इसका उन्हें राजनीतिक नुकसान भी हुआ। तारिक के लिए भी जमात से पूरी तरह दूरी बनाना मुश्किल होगा, लेकिन विदेशी मदद और विकास सुनिश्चित करने के लिए तारिक को ऐसी सरकार की वकालत करनी होगी जो भेदभाव न करे। वहीं, बीएनपी के साथ अच्छी बात है कि अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद वह बड़े जनाधार वाली अकेली पार्टी है जिसके पास मजबूत कैडर है। अभी बीएनपी आगे दिख रही है। वहीं, खालिदा जिया की मौत के बाद सहानुभूति का भी फायदा मिलने की संभावना है।
NCP ने जमात से मिलाया हाथ
इस चुनाव में बांग्लादेश की 4.6 करोड़ की युवा आबादी की अहम भूमिका होने वाली है, जिसमें से कई ने जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार को उखाड़ फेंकने वाले आंदोलन में हिस्सा लिया था। युवा आंदोलनकारियों ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया है, जिसने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ हाथ मिलाया है।
बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं
सबसे खास बात है कि बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं जोर पकड़ रही हैं। खासकर जब दिल्ली में अभी भी शेख हसीना सत्ता में हैं। इस बीच उस्मान हादी की हत्या के बाद एक नया अभियान शुरू किया है, जिसमें मैं भी हादी का नारा दिया गया है। उस्मान हादी की पहचान भारत विरोधी के रूप में रही है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बांग्लादेश के युवाओं में उनके लिए समर्थन है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या तारिक रहमान बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज हो पाएंगे या एनसीपी और जमात गठबंधन इस नए परिदृश्य का फायदा चुनावों में उठाएगा।
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