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ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच लौटेंगे रजा पहलवी! क्राउन प्रिंस की 50 साल बाद वापसी में क्या है चुनौती

Updated on 10-01-2026 12:35 PM
तेहरान: ईरान में करेंसी में गिरावट और महंगाई के मुद्दे पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन भीषण रूप जा रहे हैं। ईरान में दो हफ्ते से जारी इन प्रोटेस्ट की वजह से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है। इन प्रदर्शनों में अब तक 60 से ज्यादा मौतें होने की बात कही जा रही है। ईरान में इन प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद एक शख्स का नाम तेजी से चर्चा में आया है। यह नाम ईरान के कथित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का है। प्रदर्शनों में उनके समर्थकों ने रजा वापस आओ के नारे लगाए हैं। ऐसे में सवाल है क्या रजा 50 साल बाद तेहरान आ सकते हैं।

ईरानी शाह के सबसे बड़े बेटे और क्राउन प्रिंस रजा पहलवी 1978 में 17 साल की उम्र में पायलट की ट्रेनिंग के लिए तेहरान से अमेरिका गए थे। इसी दौरान तेहरान में प्रदर्शन होने लगे और एक साल बाद ही ईरान में राजशाही खत्म हो गई। उनके पिता यानी ईरान के आखिरी शाह को तेहरान छोड़कर भागना पड़ा। ऐसे में 1978 के बाद से रजा विदेश में हैं। हालिया विरोध प्रदर्शनों में रजा सक्रिय हुए हैं और ईरान से अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को उखाड़ फेंकने की अपील कर रहे हैं।

रजा पहलवी को ईरान में समर्थन की सच्चाई

ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई शासन के खिलाफ गुस्से और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तेहरान पुर हमले की चेतावनियों के बीच क्राउन प्रिंस रजा वापसी का रास्ता तलाश सकते हैं। आम लोगों और एक्सपर्ट ने इसका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की है कि क्या वाकई राजशाही को जमीन पर समर्थन है। आज के समय में ईरान के लोग क्या किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के बजाय राजशाही को तरजीह देंगे।

ईरानी मूल की कनाडाई राजनेता गोल्डी घमरी ने एक्स पर लिखा, 'मैं किसी ऐसे जीवित राजनेता या राष्ट्राध्यक्ष के बारे में नहीं सोच सकती जिसे ईरान के राजा रजा पहलवी जैसा समर्थन मिला हो। राष्ट्रपति ट्रंप को 60% समर्थन है और रजा पहलवी को 85% समर्थन है।' हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि यह समर्थन सोशल मीडिया तक सीामित है।

रजा पहलवी को छोटे वर्ग में ही समर्थन

राजनीतिक विश्लेषक और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिन मोदर्रेस ने बताया कि शाह के समर्थन में समाज का एक बहुत छोटा हिस्सा हैं। ये कुछ लोग हैं, जो राजशाही के लिए पुरानी यादों में जी रहे हैं। यह राजशाही से फायदा उठाने वाला वर्ग था और इनको लगता है कि राजशाही की वापसी से चीजें उनके पक्ष में बदल सकती हैं।

रजा पाहलवी की वापसी पर एक्सपर्ट इस बात पर एकमत हैं कि खामनेई शासन के रहते हुए वह कभी भी ईरान में कदम नहीं रख सकते हैं। हालांकि यह भी सवाल है कि अगर मौजूदा शासन के गिरने के बाद वह ईरान लौटते है तो क्या खामनेई सिस्टम के वफादार उन्हें बख्शेंगे। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और साजमान-ए बसीज-ए मोस्टाजाफिन उनको निशाना बना सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर रुख भी अहम

रजा पहलवी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी अहम हो जाता है। ट्रंप खामनेई शासन के घोर विरोधी हैं और उन्होंने रजा को अच्छा आदमी बताया है। हालांकि उन्होंने यह भी कह दिया कि पहलवी से मिलना उचित नहीं होगा। इससे रजा को खुला समर्थन करने में अमेरिका की हिचकिचाहट दिखती है। ये बताता है कि रजा के लिए रास्ता इतना आसान नहीं है, जितना सोशल मीडिया पर दिखता है।

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